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दुर्गा माँ के अनेक रूप में से एक माँ शैलपुत्री के बारे में आप क्या बता सकते हैं?बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम संगरिया राजस्थान की अध्यक्ष श्रीमती वनिता कासनियां पंजाबनेहा जी प्रश्न के लिए धन्यवाद।आइए देखते हैं देवी माँ का शैलपुत्री नाम कहाँ किस संदर्भ में आया है।दुर्गा सप्तशती के पाठ के आरम्भ में पाठ की सिद्धि सफलता के लिए★ कवच ★कीलक और ★अर्गलाइन तीन का पाठ करने पर जोर दिया गया है।इनमें से प्रथम देव्या कवचम के पाठ से साधक का सम्पूर्ण शरीर सभी प्रकार की बाधाओं से सुरक्षित हो जाता है।इसमें ५६ श्लोक हैं।देवी चण्डिका को नमस्कार के उपरांत इन श्लोकों में से आरंभ के तीसरे चौथे और पांचवें श्लोक में जगदंबिका के नौ नाम दिए हैं:प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्म चारिणी ।तृतीयं चंद्र घण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम।।पञ्चमं स्कन्द मातेति षष्टम कात्यायनीति च।सप्तम कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम ।।नवमं सिद्धिदात्री च नव दुर्गा: प्रकीर्तिताः।उपरोक्त नौ नामों में प्रथम नाम शैलपुत्री है। इसका अर्थ हुआ गिरिराज हिमालय की पुत्री पार्वती।यह हिमालय की तपस्या से प्रसन्न होकर उनकी पुत्री रूप में प्रकट हुईं। इसकी पुराण व्याख्या से इतर अन्य तांत्रिक व्याख्याएं भी हैं।विभिन्न पुराणों में इसका आख्यान है। इसी प्रकार अन्य नामों की भी व्याख्या है।_______________________________★शैलपुत्री पार्वती शिव की अर्धांगिनी हैं , शिव शक्ति के इस संयुक्त स्वरूप की शाक्त शैव दर्शनों में कई तरह से व्याख्या है।★यह शैलपुत्री पार्वती ही आदिशक्ति हैं जिनके विविध नाम रूप हैं। सृजन पालन संहार करने वाली शक्ति हैं,महा सरस्वती महालक्ष्मी महाकाली हैं, सर्व व्यापी चेतना हैं।________________________________दुर्गा सतशती के पंचम अध्य्याय में कहा गया है कि जब देवता , शुम्भ निशुम्भ राक्षसों से पराजित होकर गिरिराज हिमालय पर गए और वहाँ भगवती विष्णु माया की स्तुति करने लगे:"नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नमः।नमः प्रकृत्यै भद्रायै नियताः प्रणताः स्म ताम।।"उस समय देवी पार्वती गंगाजी के जल में स्नान करने के लिए वहाँ आईं और देवों से पूँछा कि आप किसकी स्तुति कर रहे हैं? तब पार्वती जी के शरीरकोश से प्रकट हुई शिवा देवी बोलीं, यह मेरी ही स्तुति कर रहे हैं।◆पार्वती के शरीर से अम्बिका के प्रादुर्भाव से पार्वती का शरीर काले रंग का हो गया अतः वे हिमालय पर रहने वाली कालिका देवी के नाम से विख्यात हुईं।(दुर्गा सप्तशती पञ्चम अध्याय श्लोक ८८ )●देवी माँ के इन नौ नाम के बाद दुर्गा सप्तशती के अगले अर्गला पाठ में ग्यारह नाम वर्णित हैं :●१-जयन्ती २-मंगला ३-काली ४-भद्रकाली ५-कपालिनी ६-दुर्गा ७-क्षमा ८-शिवा ९-धात्री १०-स्वाहा ११-स्वधा .●दुर्गा सप्तशती में परिशिष्ट में दुर्गा के बत्तीस नाम भी दिए गए हैं।मेरे विचार से विगत कुछ दशकों से देवी माँ के कवच में वर्णित नाम मीडिया में कुछ अधिक ही चर्चित हो गए हैं जबकि जिस देवी कवच में ये नाम आरम्भ में आए हैं उस कवच का कोई उल्लेख मीडिया में नहीं देखा जाता है।●इन नौ नामों के चित्र भी गीता प्रेस गोरखपुर ने उपलब्ध कराए हैं इसलिए भी इन नौ नामों का मीडिया में चलन बढ़ा है।●जबकि नव रात्रि की देवी साधना में अथवा नित्य ही दुर्गा सप्तशती के समस्त या कुछ अध्यायों का जो पाठ करते हैं उनमें इन नौ नामों का अलग से उल्लेख नहीं किया जाता।कोई देवी साधक शरीर रक्षा के लिए नित्य कवच का पाठ करते हैं उनकी उपासना में ये नौ नाम पाठ आरम्भ में स्वतः ही आ जाते हैं। इन नौ नामों में कुछ के पुराण आख्यान भी हैं ।वस्तुतः साकार सगुण रूप आसानी से मन को ग्रहण होता है इसलिए त्रिदेव, गणेश, देवी माँ के सगुण रूप ही अधिक प्रचलित हैं।★★पार्वती कुंडलिनी शक्ति के रूप में:जब कुंडलिनी शक्ति का वर्णन किया जाता है तब इस शक्ति को छह चक्रों में से प्रथम मूलाधार चक्र में स्थित माना जाता है। रोचक तथ्य यह है कि इस मूलाधार चक्र के रक्षक पार्वती पुत्र गणेश जी हैं।◆इस षड़चक्र के आधार प्रथम चक्र में ही शक्ति का वास है और इसकी कृपा के लिए सर्वप्रथम गणेश उपासना आवश्यक है।गणपति अथर्व शीर्ष में भी रक्तवर्ण गणेश को मूलाधार में स्थित कहा गया है:त्वम मूलाधार स्थितोsसि नित्यं,त्वम शक्ति त्रयात्मकः त्वाम योगिनो ध्यायन्ति नित्यमयही बात इस कथा के रूप में प्रतीक रूप से वर्णित की गई है कि पार्वती जी ने अपने शरीर के उबटन से पुतला बना कर उसमें चेतना संचार कर द्वार रक्षा में नियुक्त किया ।शक्ति से चेतन इसी पुतले को बाद में गणेश कहा गया।★तंत्र की दृष्टि से देवी माँ को दस महाविद्याओं के रूप में वर्णित किया गया है : १ काली, २ तारा, ३ श्रीविद्या या त्रिपुर सुंदरी या ललिता, ४ भुवनेश्वरी, ५ त्रिपुर भैरवी,६ धूमावती, ७ छिन्नमस्ता, ८बगला, ९ मातंगी , १० कमला।देश के विभिन्न भागों में उपरोक्त दस महाविद्याओं में से प्रत्येक के सिद्ध मन्दिर भी हैं।इतना ही क्यों सारे भारत में देवी के 52 सिद्ध पीठ भी हैं । चित्र देखिए जो गूगल के सौजन्य से आगे प्रस्तुत है।★★इनमें से हिंगलाज पीठ व एक अन्य पीठ पाकिस्तान के बलूचिस्तान क्षेत्र में है जिसकी सेवा आज भी हिन्दू मुसलमान मिलकर करते हैं ।जबकि सुगंधा व एक अन्य बंगला देश में है।दुर्गा चालीसा में भी "हिंगलाज में तुमही भवानी" ऐसा उल्लेख है ।मेरी माताजी जब यह पढ़ती थीं तो समझ नहीं आता था कि इसका क्या अर्थ है।हिंगलाजदेवी मन्दिर।चित्र इण्डिया टाइम्स के सौजन्य सेजरा विचार कीजिए कि विभिन्न भूगोल भाषा व स्थानीय संस्कृति की विविधता के बाद भी इन 52 शक्तिपीठों ने हजारों वर्षों से भारत को कितने मजबूत सांस्कृतिक एकता के सूत्र में बांधे रखा है। भले ही राजनीतिक दृष्टि से उन क्षेत्रों में अलग अलग राज्य वंशों का शासन रहा।पर अब आज के सिक्कूलर उधार बुद्धिवादी सनातन धर्म के इस एकता मूलक प्रभाव के प्रति एलर्जिक हैं।अभी देवी माँ के सगुण रूप की चर्चा की ।जबकि वेद की दृष्टि से विचार करें तो देवी माँ को मूल प्रकृति और ब्रह्म स्वरूपणी ही कहा गया है। देखिए अथर्व वेद का देवी अथर्व शीर्षम जिसमें देवों के यह प्रश्न करने पर कि देवी आप कौन हैं तो देवी ने कहा:मैं ब्रह्म स्वरूपणी हूँ। मैं ही प्रकृति और पुरुषरूपात्मक जगत हूँ। ….अहम अखिलं जगत। मैं ही रुद्र और वसु हूँ.. विष्णु ब्रह्म देव और प्रजापति को धारण करती हूँ…यह सगुण निर्गुण निरूपण बहुत ही मनोरम है।इसका सदैव अर्थ समझते हुए अध्ययन मनन करते रहना चाहिए।● प्रश्न के उत्तर का सार यानिष्कर्ष:●शैल पुत्री यह नाम देवी माँ के नौ नामों में से एक प्रथम नाम है जो शैलजा पार्वती को संबोधित है। यह देवी कवच में आया है तथा इसका पुराण में कथाआख्यान भी है।●शैल पुत्री पार्वती ही आदिशक्ति रूप हैं और शिव की अर्द्धांगिनी हैं। ●शैल पुत्री पार्वती ही महा सरस्वती महा लक्ष्मी और महाकाली हैं। शैलपुत्री पार्वती ही दश महाविद्या हैं,सृजन पालन संहारशक्ति हैं और चेतना रूप से सवर्त्र व्याप्त हैं।या देवी सर्व भूतेषु मातृ रूपेण संस्थिता ।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।: षड़चक्र चित्र, देश के शक्ति पीठ स्थल चित्र गूगल से, शैलपुत्री गीता प्रेस की पुस्तक से, हिंगलाज india times से साभार।

नेहा जी प्रश्न के लिए धन्यवाद।

आइए देखते हैं देवी माँ का शैलपुत्री नाम कहाँ किस संदर्भ में आया है।

दुर्गा सप्तशती के पाठ के आरम्भ में पाठ की सिद्धि सफलता के लिए

 कवच ★कीलक और ★अर्गला

इन तीन का पाठ करने पर जोर दिया गया है।

इनमें से प्रथम देव्या कवचम के पाठ से साधक का सम्पूर्ण शरीर सभी प्रकार की बाधाओं से सुरक्षित हो जाता है।इसमें ५६ श्लोक हैं।

देवी चण्डिका को नमस्कार के उपरांत इन श्लोकों में से आरंभ के तीसरे चौथे और पांचवें श्लोक में जगदंबिका के नौ नाम दिए हैं:

  • प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्म चारिणी ।तृतीयं चंद्र घण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम।।
  • पञ्चमं स्कन्द मातेति षष्टम कात्यायनीति च।
  • सप्तम कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम ।।
  • नवमं सिद्धिदात्री च नव दुर्गा: प्रकीर्तिताः।

उपरोक्त नौ नामों में प्रथम नाम शैलपुत्री है। इसका अर्थ हुआ गिरिराज हिमालय की पुत्री पार्वती।

यह हिमालय की तपस्या से प्रसन्न होकर उनकी पुत्री रूप में प्रकट हुईं। इसकी पुराण व्याख्या से इतर अन्य तांत्रिक व्याख्याएं भी हैं।विभिन्न पुराणों में इसका आख्यान है। इसी प्रकार अन्य नामों की भी व्याख्या है।

_______________________________

★शैलपुत्री पार्वती शिव की अर्धांगिनी हैं , शिव शक्ति के इस संयुक्त स्वरूप की शाक्त शैव दर्शनों में कई तरह से व्याख्या है।

★यह शैलपुत्री पार्वती ही आदिशक्ति हैं जिनके विविध नाम रूप हैं। सृजन पालन संहार करने वाली शक्ति हैं,महा सरस्वती महालक्ष्मी महाकाली हैं, सर्व व्यापी चेतना हैं।

________________________________

दुर्गा सतशती के पंचम अध्य्याय में कहा गया है कि जब देवता , शुम्भ निशुम्भ राक्षसों से पराजित होकर गिरिराज हिमालय पर गए और वहाँ भगवती विष्णु माया की स्तुति करने लगे:

"नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नमः।

नमः प्रकृत्यै भद्रायै नियताः प्रणताः स्म ताम।।"

उस समय देवी पार्वती गंगाजी के जल में स्नान करने के लिए वहाँ आईं और देवों से पूँछा कि आप किसकी स्तुति कर रहे हैं? तब पार्वती जी के शरीरकोश से प्रकट हुई शिवा देवी बोलीं, यह मेरी ही स्तुति कर रहे हैं।

◆पार्वती के शरीर से अम्बिका के प्रादुर्भाव से पार्वती का शरीर काले रंग का हो गया अतः वे हिमालय पर रहने वाली कालिका देवी के नाम से विख्यात हुईं।(दुर्गा सप्तशती पञ्चम अध्याय श्लोक ८८ )

●देवी माँ के इन नौ नाम के बाद दुर्गा सप्तशती के अगले अर्गला पाठ में ग्यारह नाम वर्णित हैं :

●१-जयन्ती २-मंगला ३-काली ४-भद्रकाली ५-कपालिनी ६-दुर्गा ७-क्षमा ८-शिवा ९-धात्री १०-स्वाहा ११-स्वधा .

●दुर्गा सप्तशती में परिशिष्ट में दुर्गा के बत्तीस नाम भी दिए गए हैं।

  • मेरे विचार से विगत कुछ दशकों से देवी माँ के कवच में वर्णित नाम मीडिया में कुछ अधिक ही चर्चित हो गए हैं जबकि जिस देवी कवच में ये नाम आरम्भ में आए हैं उस कवच का कोई उल्लेख मीडिया में नहीं देखा जाता है।

●इन नौ नामों के चित्र भी गीता प्रेस गोरखपुर ने उपलब्ध कराए हैं इसलिए भी इन नौ नामों का मीडिया में चलन बढ़ा है।

●जबकि नव रात्रि की देवी साधना में अथवा नित्य ही दुर्गा सप्तशती के समस्त या कुछ अध्यायों का जो पाठ करते हैं उनमें इन नौ नामों का अलग से उल्लेख नहीं किया जाता।

कोई देवी साधक शरीर रक्षा के लिए नित्य कवच का पाठ करते हैं उनकी उपासना में ये नौ नाम पाठ आरम्भ में स्वतः ही आ जाते हैं। इन नौ नामों में कुछ के पुराण आख्यान भी हैं ।

वस्तुतः साकार सगुण रूप आसानी से मन को ग्रहण होता है इसलिए त्रिदेव, गणेश, देवी माँ के सगुण रूप ही अधिक प्रचलित हैं।

★★पार्वती कुंडलिनी शक्ति के रूप में:

जब कुंडलिनी शक्ति का वर्णन किया जाता है तब इस शक्ति को छह चक्रों में से प्रथम मूलाधार चक्र में स्थित माना जाता है। रोचक तथ्य यह है कि इस मूलाधार चक्र के रक्षक पार्वती पुत्र गणेश जी हैं।

◆इस षड़चक्र के आधार प्रथम चक्र में ही शक्ति का वास है और इसकी कृपा के लिए सर्वप्रथम गणेश उपासना आवश्यक है।

गणपति अथर्व शीर्ष में भी रक्तवर्ण गणेश को मूलाधार में स्थित कहा गया है:

त्वम मूलाधार स्थितोsसि नित्यं,त्वम शक्ति त्रयात्मकः त्वाम योगिनो ध्यायन्ति नित्यम

यही बात इस कथा के रूप में प्रतीक रूप से वर्णित की गई है कि पार्वती जी ने अपने शरीर के उबटन से पुतला बना कर उसमें चेतना संचार कर द्वार रक्षा में नियुक्त किया ।शक्ति से चेतन इसी पुतले को बाद में गणेश कहा गया।

★तंत्र की दृष्टि से देवी माँ को दस महाविद्याओं के रूप में वर्णित किया गया है : १ काली, २ तारा, ३ श्रीविद्या या त्रिपुर सुंदरी या ललिता, ४ भुवनेश्वरी, ५ त्रिपुर भैरवी,६ धूमावती, ७ छिन्नमस्ता, ८बगला, ९ मातंगी , १० कमला।

देश के विभिन्न भागों में उपरोक्त दस महाविद्याओं में से प्रत्येक के सिद्ध मन्दिर भी हैं।

इतना ही क्यों सारे भारत में देवी के 52 सिद्ध पीठ भी हैं । चित्र देखिए जो गूगल के सौजन्य से आगे प्रस्तुत है।

★★इनमें से हिंगलाज पीठ व एक अन्य पीठ पाकिस्तान के बलूचिस्तान क्षेत्र में है जिसकी सेवा आज भी हिन्दू मुसलमान मिलकर करते हैं ।जबकि सुगंधा व एक अन्य बंगला देश में है।दुर्गा चालीसा में भी "हिंगलाज में तुमही भवानी" ऐसा उल्लेख है ।मेरी माताजी जब यह पढ़ती थीं तो समझ नहीं आता था कि इसका क्या अर्थ है।

हिंगलाजदेवी मन्दिर।चित्र इण्डिया टाइम्स के सौजन्य से

जरा विचार कीजिए कि विभिन्न भूगोल भाषा व स्थानीय संस्कृति की विविधता के बाद भी इन 52 शक्तिपीठों ने हजारों वर्षों से भारत को कितने मजबूत सांस्कृतिक एकता के सूत्र में बांधे रखा है। भले ही राजनीतिक दृष्टि से उन क्षेत्रों में अलग अलग राज्य वंशों का शासन रहा।

पर अब आज के सिक्कूलर उधार बुद्धिवादी सनातन धर्म के इस एकता मूलक प्रभाव के प्रति एलर्जिक हैं।

अभी देवी माँ के सगुण रूप की चर्चा की ।जबकि वेद की दृष्टि से विचार करें तो देवी माँ को मूल प्रकृति और ब्रह्म स्वरूपणी ही कहा गया है। देखिए अथर्व वेद का देवी अथर्व शीर्षम जिसमें देवों के यह प्रश्न करने पर कि देवी आप कौन हैं तो देवी ने कहा:

  • मैं ब्रह्म स्वरूपणी हूँ। मैं ही प्रकृति और पुरुषरूपात्मक जगत हूँ। ….अहम अखिलं जगत। मैं ही रुद्र और वसु हूँ.. विष्णु ब्रह्म देव और प्रजापति को धारण करती हूँ…

यह सगुण निर्गुण निरूपण बहुत ही मनोरम है।इसका सदैव अर्थ समझते हुए अध्ययन मनन करते रहना चाहिए।

 प्रश्न के उत्तर का सार यानिष्कर्ष:

●शैल पुत्री यह नाम देवी माँ के नौ नामों में से एक प्रथम नाम है जो शैलजा पार्वती को संबोधित है। यह देवी कवच में आया है तथा इसका पुराण में कथाआख्यान भी है।●शैल पुत्री पार्वती ही आदिशक्ति रूप हैं और शिव की अर्द्धांगिनी हैं। ●शैल पुत्री पार्वती ही महा सरस्वती महा लक्ष्मी और महाकाली हैं। शैलपुत्री पार्वती ही दश महाविद्या हैं,सृजन पालन संहारशक्ति हैं और चेतना रूप से सवर्त्र व्याप्त हैं।

या देवी सर्व भूतेषु मातृ रूपेण संस्थिता ।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

: षड़चक्र चित्र, देश के शक्ति पीठ स्थल चित्र गूगल से, शैलपुत्री गीता प्रेस की पुस्तक से, हिंगलाज india times से साभार।

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मेष – एलर्जी आज थोड़ी समस्या खड़ी कर सकती हैएलर्जी या सर्दी-खांसी के कारण आज सेहत पर ध्यान देने की जरूरत हो सकती है। अच्छा महसूस करने के लिए भाप लेना शुरू करें। नौकरी वाले लोगों को नए टीम के सदस्यों के साथ काम करने का मौका मिल सकता है। आज आप किसी प्रकार के रिसर्च में भी शामिल हो सकती हैं, जो आपके कार्यो में आपकी मदद करेगा। आज परिवार के सदस्य भी अपने जीवन में व्यस्त हो सकते हैं। आप काम से जुड़े मुद्दों पर परिवार के किसी बड़े सदस्य से सलाह लेने का प्रयास कर सकती हैं। आपका सामाजिक जीवन भी स्थिर बना रहेगा।लव टिप – काम में देरी पार्टनर से गलतफहमी का कारण बन सकती है। अपने पार्टनर से बहुत ज्यादा उम्मीदें नहीं रखेंएक्टिविटि टिप – स्वीमिंग करें या लंबा समय पानी में बिताएंकार्य के लिए शुभ रंग – गहरा गुलाबीप्यार के लिए शुभ रंग – पीलाकर्म टिप – समस्याओं को ज्यादा नहीं बढ़ाएंवृषभ – अत्यधिक काम समस्या खड़ी कर सकता हैअधूरी नींद और लंबे समय तक काम करने के कारण स्वास्थ्य संवेदनशील हो सकता है। नौकरी करने वालों के लिए आज नए प्रोजेक्ट्स या नई नौकरी पर स्पष्टता आने की संभावना हो सकती है। आज फाइनेंस स्थिर रहेगा साथ ही आप अपनों का ख्याल भी रख पाएंगी। पारिवारिक जीवन अस्थिर रहेगा, क्योंकि हो सकता है कि आपका कोई अपना आपकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरे। सामाजिक जीवन पीछे छूट सकता है, क्योंकि आप घर पर समय बिताना चाहेंगी और अच्छी नींद लेना चाहेंगी।लव टिप – अपने पार्टनर के साथ मतभेद नहीं रखेंएक्टिविटि टिप – अपना मनपसंद भोजन पकाने से आपको बेहतर महसूस करने में मदद मिल सकती हैकाम के लिए शुभ रंग – मौवप्यार के लिए शुभ रंग – गहरा हराकर्म टिप – अतीत को जाने देंमिथुन – आज काम और सेहत स्थिर बने रहेंगेआज स्वास्थ्य स्थिर बना रहेगा। लेकिन संचार से जुड़ी किसी समस्या के कारण काम स्थिर हो सकता है। कुछ मीटिंग्स के लिए आपको लोगों के साथ आगे-पीछे होना पड़ सकता है। लेकिन आखिर में सभी चीजें ठीक होती जाएंगी। पारिवारिक ड्रामा चलता रहेगा और आप किसी के द्वारा की गई टिप्पणियों से प्रभावित हो सकती हैं। खुद को शांत रखने के लिए किसी दोस्त से बात करें।लव टिप – आज पार्टनर सपोर्टिव रहेगा और आपको तनाव को दूर करने के लिए समय और स्पेस देगाएक्टिविटि टिप – गहरी सांस लेने या जप करने से आपको शांत होने में मदद मिलेगीकार्य के लिए शुभ रंग – ऑफ-व्हाइटप्यार के लिए शुभ रंग – कालाकर्म टिप – खुद पर भरोसा बनाएं रखेंकर्क – काम पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करने की कोशिश करेंस्वास्थ्य स्थिर बना रहेगा लेकिन काम पर किसी आलोचना के प्रति आप संवेदनशील हो सकती हैं। आपको काम पर ध्यान देने के साथ लोगों को स्पेस देने की आवश्यकता है। उल्टा रिएक्शन करने से चीजें और ज्यादा खराब हो सकती हैं। पारिवारिक जीवन स्थिर बना रहेगा और आप परिवार के साथ क्वालिटी टाइम बिता पाएंगी। आज कुछ सामाजिक योजनाएं आपका मनोरंजन कर सकती हैं। दोस्त आपको बेहतर तरीके से समझेंगे और आपके विजन पर ध्यान भी देंगे।लव टिप – आज पार्टनर आपकी सेहत को लेकर चिंतित हो सकता हैएक्टिविटि टिप – मेडिटेटिव संगीत सुनने में समय व्यतीत करेंकार्य के लिए शुभ रंग – पीलाप्यार के लिए शुभ रंग – सफेदकर्म टिप – लोगों की बातों पर ध्यान नहीं देंसिंह – अपने पारिवारिक जीवन को स्थिर बनाएं रखेंकमर के निचले हिस्से की समस्या के कारण स्वास्थ्य पर ध्यान देने की जरूरत हो सकती है। खुद को ज्यादा जोर नहीं डाले। आज काम में व्यस्तता आने की संभावना है। पुराने क्लाइंट से ज्यादा काम मिलने की संभावना भी है। काम पर दूसरों के फैसलों को नज़रअंदाज करने की गलती नहीं करें। फिर भले ही आप उनसे सहमत नहीं हों। परिवार के सदस्यों के बीच मनमुटाव होने के कारण आपका पारिवारिक जीवन अस्थिर हो सकता है। आज सामाजिक जीवन आपकी शाम व्यस्त रख सकते हैं।लव टिप – आज पार्टनर चिड़चिड़ा होने के कारण तनाव में हो सकता हैएक्टिविटि टिप – कोई खेल खेलना शुरू करेंकार्य के लिए शुभ रंग – गहरा गुलाबीप्यार के लिए शुभ रंग – हल्का हराकर्म टिप – अतित को जाने देंकन्या – अत्यधिक तनाव परेशानी खड़ी कर सकता हैब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव होने के कारण सेहत पर ध्यान देने की आवश्यकता हो सकती है। ज्यादा तनाव लेने से परहेज करें। आज काम पर दिन स्थिर रहेगा, लेकिन मीटिंग्स में देरी होने की संभावना भी है। इससे आपको तैयारी करने के साथ योजना बनाने का पर्याप्त समय मिल पाएगा। अतीत से किसी मतभेद के कारण पारिवारिक जीवन तनावपूर्ण हो सकता है। कोई आपके चीजों को छुपाने की कोशिश करेगा, जो मतभेद का कारण बन सकता है। आज सामाजिक जीवन भी पीछे छुट्ने की संभावना है।लव टिप – पार्टनर आज आपको बेहतर महसूस कराने की कोशिश करेगाएक्टिविटि टिप – अपने कमरे को व्यवस्थित करके रखेंकार्य के लिए शुभ रंग – हल्का हराप्यार के लिए शुभ रंग – गहरा नीलाकर्म टिप – एक अच्छी श्रोता बनेंतुला – आज सेहत पर खास ध्यान देने की कोशिश करेंसिर दर्द और आंखों से जुड़ी समस्याओं के कारण सेहत पर ध्यान देने की जरूरत हो सकती है। काम स्थिर बना रहेगा, लेकिन सहकर्मियों के साथ सहनशील बनी रहें। क्योंकि सिर्फ उनके काम करने का तरीका अलग हो सकता है। अगर आप सम्मान पाना चाहती हैं, तो उनके फैसलों का सम्मान करने की कोशिश करें। आज परिवार के किसी सदस्य के भावनात्मक स्वास्थ्य पर ध्यान देने की जरूरत हो सकती है। क्योंकि उनके जीवन में चल रहे तनाव के कारण वे परेशान हो सकती हैं। आपका कोई पुराना दोस्त आपसे संपर्क करने की कोशिश कर सकता है।लव टिप – पार्टनर आज आपकी बहुत ज्यादा केयर कर सकता हैएक्टिविटी टिप – प्रकृति के बीच समय बिताएंकार्य के लिए शुभ रंग – हल्का हराप्यार के लिए शुभ रंग – लैवेंडरकर्म टिप – अधिक गंभीर बनी रहेंवृश्चिक – मानसिक तनाव परेशानी का कारण बन सकता हैआज आपका काम और सेहत स्थिर बने रहेंगे, लेकिन मानसिक रूप से अस्वस्थ होने के कारण आपको ध्यान केंद्रित करने में समस्या हो सकती है। आज आपको गंभीर होने की आवश्यकता है, लेकिन कोई शारीरिक कदम उठाने की कोशिश नहीं करें। पुराने ग्राहक अधूरे कार्यो को पूरा करने के लिए आप पर दबाव बना सकते हैं। आपके परिवार के सदस्य आपसे नाराज हो सकते हैं। सामाजिक जीवन स्थिर बना रहेगा। आपका कोई दोस्त व्यापार के नए विचारों पर बातचीत करने के लिए आ सकता है।लव टिप – पार्टनर सपोर्टिव बना रहेगा और आपको स्पेस देने की कोशिश करेगाएक्टिविटि टिप – अपने मूड को बेहतर करने के लिए अच्छी फिल्में देखना शुरू करेंकार्य के लिए शुभ रंग – ऑफ-व्हाइटप्यार के लिए शुभ रंग – लालकर्म टिप – मूडी बनने से परहेज करेंधनु – बाहर के खाने से परहेज करने की कोशिश करेंपेट से जुड़ी समस्याओं के कारण सेहत पर ध्यान देने की आवश्यकता हो सकती है। इसलिए बाहर के खाने से परहेज रखें। आज काम में व्यस्तता हो सकती है। आपको रुके हुए कार्यो को पूरा करने पर ध्यान देना होगा। इससे बचने के बजाय अधिक गंभीर बनने का प्रयास करें। काम पर अटका हुआ धन दिन के दूसरे भाग में देरी का कारण बन सकता है। परिवार के किसी बड़े सदस्य का स्वास्थ्य संवेदनशील हो सकता है। उनके साथ समय बिताएं, क्योंकि वे भावनात्मक रूप से कमजोर महसूस कर रहे होंगे।लव टिप – पार्टनर पर गुस्सा करने से परहेज करेंएक्टिविटि टिप – काम के बाद नमक के पानी से स्नान करेंकार्य के लिए शुभ रंग – गहरा नीलाप्यार के लिए शुभ रंग – सफेदकर्म टिप – अधिक फ्लेक्सिबल बनी रहेंमकर – सोच समझकर ही कोई फैसला करेंआज काम स्थिर बना रहेगा, लेकिन मानसिक रूप से अस्वस्थ होने के कारण आपको ध्यान केंद्रित करने में समस्या होगी। आपको गंभीर होने की जरूरत भी है, लेकिन आज कोई शारीरिक कदम नहीं उठाएं। आपके परिवार के सदस्य घरेलू काम से जुड़े किसी कार्य के लिए आपको परेशान कर सकते हैं। सहनशील बनकर इसे पूरा करें या इसे किसी ऐसे व्यक्ति को सौंपें जो इसे संभाल सके। आज आपका सामाजिक जीवन स्थिर बना रहेगा। आप दूसरे के दोस्तों से फोन के जरिए जुड़ सकती हैं।लव टिप – पार्टनर रिलेशनशिप पर स्पष्टता पाने के लिए आपके साथ चर्चा करना चाहेगाएक्टिविटि टिप – अपनी भावनाओं पर काम करते हुए अकेले समय बिताएंकार्य के लिए शुभ रंग – हल्का गुलाबीप्यार के लिए शुभ रंग – सफेदकर्म टिप – खुद पर भरोसा बनाएं रखेंकुंभ – आज कोई शारीरिक गतिविधि करना बेहतर होगास्वास्थ्य स्थिर बना रहेगा। आपको किसी शारीरिक गतिविधि पर ध्यान देने की जरूरत होगी। काम पर आपको किसी पेपर वर्क पर ध्यान देने की आवश्यकता हो सकती है। आज दिन के दूसरे भाग में सहकर्मियों से अच्छी खबर मिलने की संभावना भी है। व्यवसाय वालों को अपनी टीम का विस्तार करने की जरूरत हो सकती है। परिवार के सदस्य आपको समझेंगे और स्पेस देने की कोशिश करेंगे। आज आपका सामाजिक जीवन स्थिर भी स्थिर बना रहेगा।लव टिप – पार्टनर अपने काम को लेकर तनाव में रहेगा और अपनी समस्या आपसे शेयर भी करेगाएक्टिविटि टिप – अपनी रचनात्मक ऊर्जा पर काम करना शुरू करेंकार्य के लिए शुभ रंग – ऑफ-व्हाइटप्यार के लिए शुभ रंग – समुद्री हराकर्म टिप – अपने फैसलों के लिए अनुमोदन नहीं लेंमीन – आज नींद में समस्या होने की संभावना हैनींद में समस्या होने की संभावना है। लेकिन काम के तनाव के कारण इमोशनल ईटिंग नहीं करें। काम स्थिर बना रहेगा। आज एक सामान्य दिन होगा जहां आपको अधूरे कार्यों पर ध्यान देने की जरूरत होगी। सहकर्मी अपनी जिम्मेदारीयों में व्यस्त रहेंगे जिससे आप आसानी से अपने कार्यो पर ध्यान दे पाएंगी। परिवार के सदस्य सहायक बने रहेंगे और आपको स्पेस देने की कोशिश करेंगे। आज आपका सामाजिक जीवन भी पीछे छूट सकता है, क्योंकि आपको अपने पार्टनर के साथ क्वालिटी टाइम बिताने की जरूरत होगी।लव टिप – पार्टनर के साथ मनमुटाव को समय से सुलझाने की कोशिश करेंएक्टिविटी टिप – काम से पहले नमक के पानी से नहाएंकार्य के लिए शुभ रंग – सफेदप्यार के लिए शुभ रंग – मौवकर्म टिप – अपनी रचनात्मक ऊर्जा पर काम करें#बाल #वनिता #महिला #वृद्ध #आश्रम .सभी देशवासियों को लोक आस्था एवं सूर्य उपासना के महापर्व छठ पूजा की हार्दिक बधाई। भगवान सूर्य देव की ऊर्जा एवं मां छठ की असीम कृपा से हम सभी का जीवन ज्योतिर्मय रहें तथा चहुंओर खुशहाली एवं समृद्धि का वास हो। लोक आस्था के महापर्व 'छठ' की हार्दिक शुभकामनाएं।भारतीय संस्कृति और प्रकृति के मध्य प्रगाढ़ संबंध को प्रदर्शित करता यह महापर्व सभी के जीवन में ऊर्जा व उत्साह का नव संचार करे, इस अवसर पर प्रकृति संरक्षण-संवर्धन के प्रति सजगता से सतत कार्य करते रहने का संकल्प लें।जय छठी मईया॥🙏#chhathpuja#वनिता #कासनियां #पंजाब 🌷🙏🙏🌷

मेष – एलर्जी आज थोड़ी समस्या खड़ी कर सकती है एलर्जी या सर्दी-खांसी के कारण आज सेहत पर ध्यान देने की जरूरत हो सकती है। अच्छा महसूस करने के लिए भाप लेना शुरू करें। नौकरी वाले लोगों को नए टीम के सदस्यों के साथ काम करने का मौका मिल सकता है। आज आप किसी प्रकार के रिसर्च में भी शामिल हो सकती हैं, जो आपके कार्यो में आपकी मदद करेगा। आज परिवार के सदस्य भी अपने जीवन में व्यस्त हो सकते हैं। आप काम से जुड़े मुद्दों पर परिवार के किसी बड़े सदस्य से सलाह लेने का प्रयास कर सकती हैं। आपका सामाजिक जीवन भी स्थिर बना रहेगा। लव टिप – काम में देरी पार्टनर से गलतफहमी का कारण बन सकती है। अपने पार्टनर से बहुत ज्यादा उम्मीदें नहीं रखें एक्टिविटि टिप – स्वीमिंग करें या लंबा समय पानी में बिताएं कार्य के लिए शुभ रंग – गहरा गुलाबी प्यार के लिए शुभ रंग – पीला कर्म टिप – समस्याओं को ज्यादा नहीं बढ़ाएं वृषभ – अत्यधिक काम समस्या खड़ी कर सकता है अधूरी नींद और लंबे समय तक काम करने के कारण स्वास्थ्य संवेदनशील हो सकता है। नौकरी करने वालों के लिए आज नए प्रोजेक्ट्स या नई नौकरी पर स्पष्टता आने की संभावना हो सकती है...