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राष्ट्र हिंदू धर्म में श्री गणेश के अवतार By वनिता कासनियां पंजाब श्री गणेश के अवतारहम सबने भगवान विष्णु के दशावतार और भगवान शंकर के १९ अवतारों के विषय में सुना है। किन्तु क्या आपको श्रीगणेश के अवतारों के विषय में पता है? वैसे तो श्रीगणेश के कई रूप और अवतार हैं किन्तु उनमें से आठ अवतार जिसे "अष्टरूप" कहते हैं, वो अधिक प्रसिद्ध हैं। इन आठ अवतारों की सबसे बड़ी विशेषता ये है कि इन्ही सभी अवतारों में श्रीगणेश ने अपने शत्रुओं का वध नहीं किया बल्कि उनके प्रताप से वे सभी स्वतः उनके भक्त हो गए। आइये उसके विषय में कुछ जानते हैं।वक्रतुंड: मत्स्यरासुर नामक एक राक्षस था जो महादेव का बड़ा भक्त था। उसने भगवान शंकर की तपस्या कर ये वरदान प्राप्त किया कि उसे किसी का भय ना हो। वरदान पाने के बाद मत्सरासुर ने देवताओं को प्रताडि़त करना शुरू कर दिया। उसके दो पुत्र थे - सुंदरप्रिय और विषयप्रिय जो अपने पिता के समान ही अत्याचारी थे। उनके अत्याचार से तंग आकर सभी देवता महादेव की शरण में पहुंचे। शिवजी ने उन्हें श्रीगणेश का आह्वान करने को कहा। देवताओं की आराधना पर श्रीगणेश ने विकट सूंड वाले "वक्रतुंड" अवतार लिया और मत्सरासुर को ललकारा। अपने पिता की रक्षा के लिए सुंदरप्रिय और विषप्रिय दोनों ने उनपर आक्रमण किया किन्तु श्रीगणेश ने उन्हें तत्काल अपनी सूंड में लपेट कर मार डाला। ये देख कर मत्सरासुर ने अपनी पराजय स्वीकार की और श्रीगणेश का भक्त बन गया।एकदंत: एक बार महर्षि च्यवन को एक पुत्र की इच्छा हुई तो उन्होंने अपने तपोबल से मद नाम के राक्षस की रचना की। वह च्यवन का पुत्र कहलाया। मद ने दैत्यगुरु शुक्राचार्य से शिक्षा ली और हर प्रकार की विद्या और युद्धकला में निपुण बन गया। अपनी सिद्धियों के बल पर उसने देवताओं का विरोध शुरू कर दिया और सभी देवता उससे प्रताडि़त रहने लगे। सभी देवों ने एक स्वर में श्रीगणेश को पुकारा। इनकी रक्षा के लिए तब वे "एकदंत" के रूप में प्रकट हुए। उनकी चार भुजाएं और एक दांत था। वे चतुर्भुज रूप में थे जिनके हाथ में पाश, परशु, अंकुश और कमल था। एकदंत ने देवताओं को अभय का वरदान दिया और मदासुर को युद्ध में पराजित किया।महोदर: जब कार्तिकेय जी ने तारकासुर का वध कर दिया तो दैत्य गुरु शुक्राचार्य ने मोहासुर नाम के दैत्य को देवताओं के विरुद्ध खड़ा किया। वे अनेक अस्त्र-शस्त्रों का ज्ञाता था और उसका शरीर बहुत विशाल था। उसकी शक्ति की भी कोई सीमा नहीं थी। जब उस विकट रूप में मोहासुर देवताओं के सामने पहुंचा तो वे भयभीत हो गए। तब देवताओं की रक्षा के लिए श्रीगणेश ने "महोदर" अवतार लिया। उस रूप में उनका उदर अर्थात पेट इतना बड़ा था कि उसने आकाश को आच्छादित कर दिया। जब वे मोहासुर के समक्ष पहुंचे तो उनका वो अद्भुत रूप देख कर मोहासुर ने बिना युद्ध के ही आत्मसमर्पण कर दिया। उसके बाद उसने देव महोदर को ही अपना इष्ट बना लिया।विकट: जालंधर और वृंदा की कथा तो हम सभी जानते हैं। जब श्रीहरि ने जालंधर के विनाश हेतु उसकी पत्नी वृंदा का सतीत्व भंग किया तो महादेव ने जालंधर का वध कर दिया। तत्पश्चात वृंदा ने आत्मदाह कर लिया और उन्ही के क्रोध से कामासुर का एक महापराक्रमी दैत्य उत्पन्न हुआ। उसने महादेव से कई अवतार प्राप्त कर त्रिलोक पर अधिकार जमा लिया। त्रिलोक को त्रस्त जान कर श्रीगणेश ने "विकट" रूप में अवतार लिया और अपने उस अवतार में उन्होंने अपने बड़े भाई कार्तिकेय के मयूर को अपना वाहन बनाया। उसके बाद उन्होंने कामासुर को घोर युद्ध कर उसे पराजित किया और देवताओं को निष्कंटक किया। बाद में कामासुर श्रीगणेश का भक्त बन गया। गजानन: एक बार धनपति कुबेर को अपने धन पर अहंकार और लोभ हो गया। उनके लोभ से लोभासुर नाम के असुर का जन्म हुआ। मार्गदर्शन के लिए वो शुक्राचार्य की शरण में गया। शुक्राचार्य ने उसे महादेव की तपस्या करने का आदेश दिया। उसने भोलेनाथ की घोर तपस्या की जिसके बाद महादेव ने उसे त्रिलोक विजय का वरदान दे दिया। उस वरदान के मद में लोभासुर स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल का अधिपति हो गया। सारे देवता स्वर्ग से हाथ धोकर अपने गुरु बृहस्पति के पास गए। देवगुरु ने उन्हें श्रीगणेश की तपस्या करने को कहा। देवराज इंद्र के साथ सभी देवों ने श्रीगणेश की तपस्या की जिससे श्रीगणेश प्रसन्न हुए और उन्होंने देवताओं को आश्वासन दिया कि वे अवश्य उनका उद्धार करेंगे। गणेशजी "गजानन" रूप में पृथ्वी पर आये और अपने मूषक द्वारा लोभासुर को युद्ध का सन्देश भेजा। जब शुक्राचार्य ने जाना कि गजानन स्वयं आये हैं तो लोभासुर की पराजय निश्चित जान कर उन्होंने उसे श्रीगणेश की शरण में जाने का उपदेश दिया। अपनी गुरु की बात सुनकर लोभासुर ने बिना युद्ध किए ही अपनी पराजय स्वीकार कर ली और उनका भक्त बन गया।लंबोदर: क्रोधासुर नाम नाम का एक दैत्य था जो अजेय बनना चाहता था। उसने इसी इच्छा से भगवान सूर्यनारायण की तपस्या की और उनसे ब्रह्माण्ड विजय का वरदान प्राप्त कर लिया। वरदान प्राप्त करने के बाद क्रोधासुर विश्वविजय के अभियान पर निकला। उसे स्वर्ग की ओर आते देख इंद्र और सभी देवता भयभीत हो गए। उन्होंने श्रीगणेश से प्रार्थना की कि वो किसी भी प्रकार क्रोधासुर को स्वर्ग पहुँचने से रोकें। तब वे "लम्बोदर" का रूप लेकर क्रोधासुर के पास आये और उसे समझाया कि वो कभी भी अजेय नहीं बन सकता। इस पर क्रोधासुर उनकी बात ना मान कर स्वर्ग की ओर बढ़ने लगा। ये देख कर श्रीगणेश ने अपने उदर (पेट) द्वारा उस मार्ग को बंद कर दिया। ये देख कर क्रोधासुर दूसरे मार्ग की ओर मुड़ा। तब लम्बोदर रुपी श्रीगणेश ने अपने उदर को विस्तृत कर वो मार्ग भी रुद्ध कर दिया। क्रोधासुर जिस भी मार्ग पर जाता, श्रीगणेश अपने उदर से उस मार्ग को बंद कर देते। ये देख कर क्रोधासुर का अभिमान समाप्त हुआ और वो श्रीगणेश का भक्त बन गया। उनके आदेश पर उसने अपना युद्ध अभियान बंद कर दिया और पाताल में जाकर बस गया।विघ्नराज: एक बार माता पार्वती कैलाश पर अपनी सखियों के साथ बातचीत कर रही थी। उसी दौरान वे जोर से हंस पड़ीं। उनकी हंसी से एक विशाल पुरुष की उत्पत्ति हुई। चूँकि उसका जन्म माता पार्वती के ममता भाव से हुआ था इसीलिए उन्होंने उसका नाम मम रखा। बाद में मम देवी पार्वती की आज्ञा से वन में तपस्या करने चला गया। वही वो असुरराज शंबरासुर से मिला। उसे योग्य जान कर शम्बरासुर ने उसे कई प्रकार की आसुरी शक्तियां सिखा दीं। बाद में शम्बरासुर ने मम को श्री गणेश की उपासना करने को कहा। मम ने गणपति को प्रसन्न कर अपार शक्ति का स्वामी बन गया। तप पूर्ण होने के बाद शम्बरासुर ने उसका विवाह अपनी पुत्री मोहिनी के साथ कर दिया। जब दैत्यगुरु शुक्राचार्य ने मम के तप के बारे में सुना तो उन्होंने उसे दैत्यराज के पद पर विभूषित कर दिया। अपने बल के मद में आकर ममासुर ने देवताओं पर आक्रमण किया और उन्हें परास्त कर कारागार में डाल दिया। तब उसी कारावास में देवताओं ने गणेश की उपासना की जिससे प्रसन्न हो श्रीगणेश "विघ्नराज" (विघ्नेश्वर) के रूप में अवतरित हुए। उन्होंने ममासुर को युद्ध के लिए ललकारा और उसे परास्त कर उसका मान मर्दन किया। अंततः ममासुर उनकी शरण में आ गया। तत्पश्चात उन्होंने देवताओं को मुक्त कर उनके विघ्न का नाश किया। धूम्रवर्ण: एक बार भगवान सूर्यनारायण को छींक आ गई और उनकी छींक से एक दैत्य की उत्पत्ति हुई। उस दैत्य का नाम उन्होंने अहम रखा। उसने दैत्यगुरु शुक्राचार्य से शिक्षा ली और अहंतासुर नाम से प्रसिद्ध हुआ। बाद में उसने अपना स्वयं का राज्य बसाया और तप कर श्रीगणेश को प्रसन्न किया। उनसे उसे अनेकानेक वरदान प्राप्त हुए। वरदान प्राप्त कर वो निरंकुश हो गया और बहुत अत्याचार और अनाचार फैलाया। तब उसे रोकने के लिए श्री गणेश ने धुंए के रंग वाले रूप में अवतार लिया और उसी कारण उनका नाम "धूम्रवर्ण" पड़ा। उनके हाथ में एक दुर्जय पाश था जिससे सदैव ज्वालाएं निकलती रहती थीं। धूम्रवर्ण के रुप में गणेश जी ने अहंतासुर को उस पाश से जकड लिया। अहम् ने उस पाश से छूटने का बड़ा प्रयास किया किन्तु सफल नहीं हुआ। अंत में उसने अपनी पराजय स्वीकार कर ली और देव धूम्रवर्ण की शरण में आ गया। तब उन्होंने अहंतासुर को अपनी अनंत भक्ति प्रदान की।

राष्ट्र हिंदू धर्म में श्रीगणेश के अवतार

श्रीगणेश के अवतार
हम सबने भगवान विष्णु के दशावतार और भगवान शंकर के १९ अवतारों के विषय में सुना है। किन्तु क्या आपको श्रीगणेश के अवतारों के विषय में पता है? वैसे तो श्रीगणेश के कई रूप और अवतार हैं किन्तु उनमें से आठ अवतार जिसे "अष्टरूप" कहते हैं, वो अधिक प्रसिद्ध हैं। इन आठ अवतारों की सबसे बड़ी विशेषता ये है कि इन्ही सभी अवतारों में श्रीगणेश ने अपने शत्रुओं का वध नहीं किया बल्कि उनके प्रताप से वे सभी स्वतः उनके भक्त हो गए। आइये उसके विषय में कुछ जानते हैं।
  1. वक्रतुंड: मत्स्यरासुर नामक एक राक्षस था जो महादेव का बड़ा भक्त था। उसने भगवान शंकर की तपस्या कर ये वरदान प्राप्त किया कि उसे किसी का भय ना हो। वरदान पाने के बाद मत्सरासुर ने देवताओं को प्रताडि़त करना शुरू कर दिया। उसके दो पुत्र थे - सुंदरप्रिय और विषयप्रिय जो अपने पिता के समान ही अत्याचारी थे। उनके अत्याचार से तंग आकर सभी देवता महादेव की शरण में पहुंचे। शिवजी ने उन्हें श्रीगणेश का आह्वान करने को कहा। देवताओं की आराधना पर श्रीगणेश ने विकट सूंड वाले "वक्रतुंड" अवतार लिया और मत्सरासुर को ललकारा। अपने पिता की रक्षा के लिए सुंदरप्रिय और विषप्रिय दोनों ने उनपर आक्रमण किया किन्तु श्रीगणेश ने उन्हें तत्काल अपनी सूंड में लपेट कर मार डाला। ये देख कर मत्सरासुर ने अपनी पराजय स्वीकार की और श्रीगणेश का भक्त बन गया।
  2. एकदंत: एक बार महर्षि च्यवन को एक पुत्र की इच्छा हुई तो उन्होंने अपने तपोबल से मद नाम के राक्षस की रचना की। वह च्यवन का पुत्र कहलाया। मद ने दैत्यगुरु शुक्राचार्य से शिक्षा ली और हर प्रकार की विद्या और युद्धकला में निपुण बन गया। अपनी सिद्धियों के बल पर उसने देवताओं का विरोध शुरू कर दिया और सभी देवता उससे प्रताडि़त रहने लगे। सभी देवों ने एक स्वर में श्रीगणेश को पुकारा। इनकी रक्षा के लिए तब वे "एकदंत" के रूप में प्रकट हुए। उनकी चार भुजाएं और एक दांत था। वे चतुर्भुज रूप में थे जिनके हाथ में पाश, परशु, अंकुश और कमल था। एकदंत ने देवताओं को अभय का वरदान दिया और मदासुर को युद्ध में पराजित किया।
  3. महोदर: जब कार्तिकेय जी ने तारकासुर का वध कर दिया तो दैत्य गुरु शुक्राचार्य ने मोहासुर नाम के दैत्य को देवताओं के विरुद्ध खड़ा किया। वे अनेक अस्त्र-शस्त्रों का ज्ञाता था और उसका शरीर बहुत विशाल था। उसकी शक्ति की भी कोई सीमा नहीं थी। जब उस विकट रूप में मोहासुर देवताओं के सामने पहुंचा तो वे भयभीत हो गए। तब देवताओं की रक्षा के लिए श्रीगणेश ने "महोदर" अवतार लिया। उस रूप में उनका उदर अर्थात पेट इतना बड़ा था कि उसने आकाश को आच्छादित कर दिया। जब वे मोहासुर के समक्ष पहुंचे तो उनका वो अद्भुत रूप देख कर मोहासुर ने बिना युद्ध के ही आत्मसमर्पण कर दिया। उसके बाद उसने देव महोदर को ही अपना इष्ट बना लिया।
  4. विकट: जालंधर और वृंदा की कथा तो हम सभी जानते हैं। जब श्रीहरि ने जालंधर के विनाश हेतु उसकी पत्नी वृंदा का सतीत्व भंग किया तो महादेव ने जालंधर का वध कर दिया। तत्पश्चात वृंदा ने आत्मदाह कर लिया और उन्ही के क्रोध से कामासुर का एक महापराक्रमी दैत्य उत्पन्न हुआ। उसने महादेव से कई अवतार प्राप्त कर त्रिलोक पर अधिकार जमा लिया। त्रिलोक को त्रस्त जान कर श्रीगणेश ने "विकट" रूप में अवतार लिया और अपने उस अवतार में उन्होंने अपने बड़े भाई कार्तिकेय के मयूर को अपना वाहन बनाया। उसके बाद उन्होंने कामासुर को घोर युद्ध कर उसे पराजित किया और देवताओं को निष्कंटक किया। बाद में कामासुर श्रीगणेश का भक्त बन गया। 
  5. गजानन: एक बार धनपति कुबेर को अपने धन पर अहंकार और लोभ हो गया। उनके लोभ से लोभासुर नाम के असुर का जन्म हुआ। मार्गदर्शन के लिए वो शुक्राचार्य की शरण में गया। शुक्राचार्य ने उसे महादेव की तपस्या करने का आदेश दिया। उसने भोलेनाथ की घोर तपस्या की जिसके बाद महादेव ने उसे त्रिलोक विजय का वरदान दे दिया। उस वरदान के मद में लोभासुर स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल का अधिपति हो गया। सारे देवता स्वर्ग से हाथ धोकर अपने गुरु बृहस्पति के पास गए। देवगुरु ने उन्हें श्रीगणेश की तपस्या करने को कहा। देवराज इंद्र के साथ सभी देवों ने श्रीगणेश की तपस्या की जिससे श्रीगणेश प्रसन्न हुए और उन्होंने देवताओं को आश्वासन दिया कि वे अवश्य उनका उद्धार करेंगे। गणेशजी "गजानन" रूप में पृथ्वी पर आये और अपने मूषक द्वारा लोभासुर को युद्ध का सन्देश भेजा। जब शुक्राचार्य ने जाना कि गजानन स्वयं आये हैं तो लोभासुर की पराजय निश्चित जान कर उन्होंने उसे श्रीगणेश की शरण में जाने का उपदेश दिया। अपनी गुरु की बात सुनकर लोभासुर ने बिना युद्ध किए ही अपनी पराजय स्वीकार कर ली और उनका भक्त बन गया।
  6. लंबोदर: क्रोधासुर नाम नाम का एक दैत्य था जो अजेय बनना चाहता था। उसने इसी इच्छा से भगवान सूर्यनारायण की तपस्या की और उनसे ब्रह्माण्ड विजय का वरदान प्राप्त कर लिया। वरदान प्राप्त करने के बाद क्रोधासुर विश्वविजय के अभियान पर निकला। उसे स्वर्ग की ओर आते देख इंद्र और सभी देवता भयभीत हो गए। उन्होंने श्रीगणेश से प्रार्थना की कि वो किसी भी प्रकार क्रोधासुर को स्वर्ग पहुँचने से रोकें। तब वे "लम्बोदर" का रूप लेकर क्रोधासुर के पास आये और उसे समझाया कि वो कभी भी अजेय नहीं बन सकता। इस पर क्रोधासुर उनकी बात ना मान कर स्वर्ग की ओर बढ़ने लगा। ये देख कर श्रीगणेश ने अपने उदर (पेट) द्वारा उस मार्ग को बंद कर दिया। ये देख कर क्रोधासुर दूसरे मार्ग की ओर मुड़ा। तब लम्बोदर रुपी श्रीगणेश ने अपने उदर को विस्तृत कर वो मार्ग भी रुद्ध कर दिया। क्रोधासुर जिस भी मार्ग पर जाता, श्रीगणेश अपने उदर से उस मार्ग को बंद कर देते। ये देख कर क्रोधासुर का अभिमान समाप्त हुआ और वो श्रीगणेश का भक्त बन गया। उनके आदेश पर उसने अपना युद्ध अभियान बंद कर दिया और पाताल में जाकर बस गया।
  7. विघ्नराज: एक बार माता पार्वती कैलाश पर अपनी सखियों के साथ बातचीत कर रही थी। उसी दौरान वे जोर से हंस पड़ीं। उनकी हंसी से एक विशाल पुरुष की उत्पत्ति हुई। चूँकि उसका जन्म माता पार्वती के ममता भाव से हुआ था इसीलिए उन्होंने उसका नाम मम रखा। बाद में मम देवी पार्वती की आज्ञा से वन में तपस्या करने चला गया। वही वो असुरराज शंबरासुर से मिला। उसे योग्य जान कर शम्बरासुर ने उसे कई प्रकार की आसुरी शक्तियां सिखा दीं। बाद में शम्बरासुर ने मम को श्री गणेश की उपासना करने को कहा। मम ने गणपति को प्रसन्न कर अपार शक्ति का स्वामी बन गया। तप पूर्ण होने के बाद शम्बरासुर ने उसका विवाह अपनी पुत्री मोहिनी के साथ कर दिया। जब दैत्यगुरु शुक्राचार्य ने मम के तप के बारे में सुना तो उन्होंने उसे दैत्यराज के पद पर विभूषित कर दिया। अपने बल के मद में आकर ममासुर ने देवताओं पर आक्रमण किया और उन्हें परास्त कर कारागार में डाल दिया। तब उसी कारावास में देवताओं ने गणेश की उपासना की जिससे प्रसन्न हो श्रीगणेश "विघ्नराज" (विघ्नेश्वर) के रूप में अवतरित हुए। उन्होंने ममासुर को युद्ध के लिए ललकारा और उसे परास्त कर उसका मान मर्दन किया। अंततः ममासुर उनकी शरण में आ गया। तत्पश्चात उन्होंने देवताओं को मुक्त कर उनके विघ्न का नाश किया। 
  8. धूम्रवर्ण: एक बार भगवान सूर्यनारायण को छींक आ गई और उनकी छींक से एक दैत्य की उत्पत्ति हुई। उस दैत्य का नाम उन्होंने अहम रखा। उसने दैत्यगुरु शुक्राचार्य से शिक्षा ली और अहंतासुर नाम से प्रसिद्ध हुआ। बाद में उसने अपना स्वयं का राज्य बसाया और तप कर श्रीगणेश को प्रसन्न किया। उनसे उसे अनेकानेक वरदान प्राप्त हुए। वरदान प्राप्त कर वो निरंकुश हो गया और बहुत अत्याचार और अनाचार फैलाया। तब उसे रोकने के लिए श्री गणेश ने धुंए के रंग वाले रूप में अवतार लिया और उसी कारण उनका नाम "धूम्रवर्ण" पड़ा। उनके हाथ में एक दुर्जय पाश था जिससे सदैव ज्वालाएं निकलती रहती थीं। धूम्रवर्ण के रुप में गणेश जी ने अहंतासुर को उस पाश से जकड लिया। अहम् ने उस पाश से छूटने का बड़ा प्रयास किया किन्तु सफल नहीं हुआ। अंत में उसने अपनी पराजय स्वीकार कर ली और देव धूम्रवर्ण की शरण में आ गया। तब उन्होंने अहंतासुर को अपनी अनंत भक्ति प्रदान की।

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 ❁══❁❁═ ══❁❁══❁ ❁ राधे माला किर्तन पोस्ट ❁ ❁══❁❁═ ══❁❁══❁ हे कृष्ण🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 सुना है , आँखों मे तेरी , प्रेम समन्दर बसते हैं ।   फिर भी हम, एक बून्द , पानी को तरसते हैं ।🌹 मिटा दो , जन्मों जन्मों की प्यास , साँवरे। 💐🪻 प्रेम उत्सव मे बीत जाये , जीवन डगर प्यारे।🌹 🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴 मेरी सांस सांस में तेरा, है नाम मुरली वाले॥ मुझे चरणों से लगा ले, मेरे श्याम मुरली वाले। भक्तो की तुमने विपदा टारी मुझे भी आके थाम मुरलीवाले।। 🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷 विघ्न बनाये तुमने, कर पार मुरली वाले॥ मुझे चरणों से लगा ले, मेरे श्याम मुरली वाले। मेरी सांस सांस में तेरा, है नाम मुरली वाले॥ 🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸 पतझड़ है मेरा जीवन, बन के बहार आजा। सुन ले पुकार कान्हा, बस एक बार आजा। बैचैन मन के तुम ही, आराम मुरली वाले॥ 💦💦💦💦💦💦💦💦💦💦💦💦💦 मुझे चरणों से लगा ले, मेरे श्याम मुरली वाले। मेरी सांस सांस में तेरा, है नाम मुरली वाले॥ 🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥 तुम हो दया के सागर, जनमों की मैं हूँ प्यासी। दे दो जगह मुझे भी, चरणों में बस ज़रा सी। सुबह तुम ही ...

मेष – एलर्जी आज थोड़ी समस्या खड़ी कर सकती हैएलर्जी या सर्दी-खांसी के कारण आज सेहत पर ध्यान देने की जरूरत हो सकती है। अच्छा महसूस करने के लिए भाप लेना शुरू करें। नौकरी वाले लोगों को नए टीम के सदस्यों के साथ काम करने का मौका मिल सकता है। आज आप किसी प्रकार के रिसर्च में भी शामिल हो सकती हैं, जो आपके कार्यो में आपकी मदद करेगा। आज परिवार के सदस्य भी अपने जीवन में व्यस्त हो सकते हैं। आप काम से जुड़े मुद्दों पर परिवार के किसी बड़े सदस्य से सलाह लेने का प्रयास कर सकती हैं। आपका सामाजिक जीवन भी स्थिर बना रहेगा।लव टिप – काम में देरी पार्टनर से गलतफहमी का कारण बन सकती है। अपने पार्टनर से बहुत ज्यादा उम्मीदें नहीं रखेंएक्टिविटि टिप – स्वीमिंग करें या लंबा समय पानी में बिताएंकार्य के लिए शुभ रंग – गहरा गुलाबीप्यार के लिए शुभ रंग – पीलाकर्म टिप – समस्याओं को ज्यादा नहीं बढ़ाएंवृषभ – अत्यधिक काम समस्या खड़ी कर सकता हैअधूरी नींद और लंबे समय तक काम करने के कारण स्वास्थ्य संवेदनशील हो सकता है। नौकरी करने वालों के लिए आज नए प्रोजेक्ट्स या नई नौकरी पर स्पष्टता आने की संभावना हो सकती है। आज फाइनेंस स्थिर रहेगा साथ ही आप अपनों का ख्याल भी रख पाएंगी। पारिवारिक जीवन अस्थिर रहेगा, क्योंकि हो सकता है कि आपका कोई अपना आपकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरे। सामाजिक जीवन पीछे छूट सकता है, क्योंकि आप घर पर समय बिताना चाहेंगी और अच्छी नींद लेना चाहेंगी।लव टिप – अपने पार्टनर के साथ मतभेद नहीं रखेंएक्टिविटि टिप – अपना मनपसंद भोजन पकाने से आपको बेहतर महसूस करने में मदद मिल सकती हैकाम के लिए शुभ रंग – मौवप्यार के लिए शुभ रंग – गहरा हराकर्म टिप – अतीत को जाने देंमिथुन – आज काम और सेहत स्थिर बने रहेंगेआज स्वास्थ्य स्थिर बना रहेगा। लेकिन संचार से जुड़ी किसी समस्या के कारण काम स्थिर हो सकता है। कुछ मीटिंग्स के लिए आपको लोगों के साथ आगे-पीछे होना पड़ सकता है। लेकिन आखिर में सभी चीजें ठीक होती जाएंगी। पारिवारिक ड्रामा चलता रहेगा और आप किसी के द्वारा की गई टिप्पणियों से प्रभावित हो सकती हैं। खुद को शांत रखने के लिए किसी दोस्त से बात करें।लव टिप – आज पार्टनर सपोर्टिव रहेगा और आपको तनाव को दूर करने के लिए समय और स्पेस देगाएक्टिविटि टिप – गहरी सांस लेने या जप करने से आपको शांत होने में मदद मिलेगीकार्य के लिए शुभ रंग – ऑफ-व्हाइटप्यार के लिए शुभ रंग – कालाकर्म टिप – खुद पर भरोसा बनाएं रखेंकर्क – काम पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करने की कोशिश करेंस्वास्थ्य स्थिर बना रहेगा लेकिन काम पर किसी आलोचना के प्रति आप संवेदनशील हो सकती हैं। आपको काम पर ध्यान देने के साथ लोगों को स्पेस देने की आवश्यकता है। उल्टा रिएक्शन करने से चीजें और ज्यादा खराब हो सकती हैं। पारिवारिक जीवन स्थिर बना रहेगा और आप परिवार के साथ क्वालिटी टाइम बिता पाएंगी। आज कुछ सामाजिक योजनाएं आपका मनोरंजन कर सकती हैं। दोस्त आपको बेहतर तरीके से समझेंगे और आपके विजन पर ध्यान भी देंगे।लव टिप – आज पार्टनर आपकी सेहत को लेकर चिंतित हो सकता हैएक्टिविटि टिप – मेडिटेटिव संगीत सुनने में समय व्यतीत करेंकार्य के लिए शुभ रंग – पीलाप्यार के लिए शुभ रंग – सफेदकर्म टिप – लोगों की बातों पर ध्यान नहीं देंसिंह – अपने पारिवारिक जीवन को स्थिर बनाएं रखेंकमर के निचले हिस्से की समस्या के कारण स्वास्थ्य पर ध्यान देने की जरूरत हो सकती है। खुद को ज्यादा जोर नहीं डाले। आज काम में व्यस्तता आने की संभावना है। पुराने क्लाइंट से ज्यादा काम मिलने की संभावना भी है। काम पर दूसरों के फैसलों को नज़रअंदाज करने की गलती नहीं करें। फिर भले ही आप उनसे सहमत नहीं हों। परिवार के सदस्यों के बीच मनमुटाव होने के कारण आपका पारिवारिक जीवन अस्थिर हो सकता है। आज सामाजिक जीवन आपकी शाम व्यस्त रख सकते हैं।लव टिप – आज पार्टनर चिड़चिड़ा होने के कारण तनाव में हो सकता हैएक्टिविटि टिप – कोई खेल खेलना शुरू करेंकार्य के लिए शुभ रंग – गहरा गुलाबीप्यार के लिए शुभ रंग – हल्का हराकर्म टिप – अतित को जाने देंकन्या – अत्यधिक तनाव परेशानी खड़ी कर सकता हैब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव होने के कारण सेहत पर ध्यान देने की आवश्यकता हो सकती है। ज्यादा तनाव लेने से परहेज करें। आज काम पर दिन स्थिर रहेगा, लेकिन मीटिंग्स में देरी होने की संभावना भी है। इससे आपको तैयारी करने के साथ योजना बनाने का पर्याप्त समय मिल पाएगा। अतीत से किसी मतभेद के कारण पारिवारिक जीवन तनावपूर्ण हो सकता है। कोई आपके चीजों को छुपाने की कोशिश करेगा, जो मतभेद का कारण बन सकता है। आज सामाजिक जीवन भी पीछे छुट्ने की संभावना है।लव टिप – पार्टनर आज आपको बेहतर महसूस कराने की कोशिश करेगाएक्टिविटि टिप – अपने कमरे को व्यवस्थित करके रखेंकार्य के लिए शुभ रंग – हल्का हराप्यार के लिए शुभ रंग – गहरा नीलाकर्म टिप – एक अच्छी श्रोता बनेंतुला – आज सेहत पर खास ध्यान देने की कोशिश करेंसिर दर्द और आंखों से जुड़ी समस्याओं के कारण सेहत पर ध्यान देने की जरूरत हो सकती है। काम स्थिर बना रहेगा, लेकिन सहकर्मियों के साथ सहनशील बनी रहें। क्योंकि सिर्फ उनके काम करने का तरीका अलग हो सकता है। अगर आप सम्मान पाना चाहती हैं, तो उनके फैसलों का सम्मान करने की कोशिश करें। आज परिवार के किसी सदस्य के भावनात्मक स्वास्थ्य पर ध्यान देने की जरूरत हो सकती है। क्योंकि उनके जीवन में चल रहे तनाव के कारण वे परेशान हो सकती हैं। आपका कोई पुराना दोस्त आपसे संपर्क करने की कोशिश कर सकता है।लव टिप – पार्टनर आज आपकी बहुत ज्यादा केयर कर सकता हैएक्टिविटी टिप – प्रकृति के बीच समय बिताएंकार्य के लिए शुभ रंग – हल्का हराप्यार के लिए शुभ रंग – लैवेंडरकर्म टिप – अधिक गंभीर बनी रहेंवृश्चिक – मानसिक तनाव परेशानी का कारण बन सकता हैआज आपका काम और सेहत स्थिर बने रहेंगे, लेकिन मानसिक रूप से अस्वस्थ होने के कारण आपको ध्यान केंद्रित करने में समस्या हो सकती है। आज आपको गंभीर होने की आवश्यकता है, लेकिन कोई शारीरिक कदम उठाने की कोशिश नहीं करें। पुराने ग्राहक अधूरे कार्यो को पूरा करने के लिए आप पर दबाव बना सकते हैं। आपके परिवार के सदस्य आपसे नाराज हो सकते हैं। सामाजिक जीवन स्थिर बना रहेगा। आपका कोई दोस्त व्यापार के नए विचारों पर बातचीत करने के लिए आ सकता है।लव टिप – पार्टनर सपोर्टिव बना रहेगा और आपको स्पेस देने की कोशिश करेगाएक्टिविटि टिप – अपने मूड को बेहतर करने के लिए अच्छी फिल्में देखना शुरू करेंकार्य के लिए शुभ रंग – ऑफ-व्हाइटप्यार के लिए शुभ रंग – लालकर्म टिप – मूडी बनने से परहेज करेंधनु – बाहर के खाने से परहेज करने की कोशिश करेंपेट से जुड़ी समस्याओं के कारण सेहत पर ध्यान देने की आवश्यकता हो सकती है। इसलिए बाहर के खाने से परहेज रखें। आज काम में व्यस्तता हो सकती है। आपको रुके हुए कार्यो को पूरा करने पर ध्यान देना होगा। इससे बचने के बजाय अधिक गंभीर बनने का प्रयास करें। काम पर अटका हुआ धन दिन के दूसरे भाग में देरी का कारण बन सकता है। परिवार के किसी बड़े सदस्य का स्वास्थ्य संवेदनशील हो सकता है। उनके साथ समय बिताएं, क्योंकि वे भावनात्मक रूप से कमजोर महसूस कर रहे होंगे।लव टिप – पार्टनर पर गुस्सा करने से परहेज करेंएक्टिविटि टिप – काम के बाद नमक के पानी से स्नान करेंकार्य के लिए शुभ रंग – गहरा नीलाप्यार के लिए शुभ रंग – सफेदकर्म टिप – अधिक फ्लेक्सिबल बनी रहेंमकर – सोच समझकर ही कोई फैसला करेंआज काम स्थिर बना रहेगा, लेकिन मानसिक रूप से अस्वस्थ होने के कारण आपको ध्यान केंद्रित करने में समस्या होगी। आपको गंभीर होने की जरूरत भी है, लेकिन आज कोई शारीरिक कदम नहीं उठाएं। आपके परिवार के सदस्य घरेलू काम से जुड़े किसी कार्य के लिए आपको परेशान कर सकते हैं। सहनशील बनकर इसे पूरा करें या इसे किसी ऐसे व्यक्ति को सौंपें जो इसे संभाल सके। आज आपका सामाजिक जीवन स्थिर बना रहेगा। आप दूसरे के दोस्तों से फोन के जरिए जुड़ सकती हैं।लव टिप – पार्टनर रिलेशनशिप पर स्पष्टता पाने के लिए आपके साथ चर्चा करना चाहेगाएक्टिविटि टिप – अपनी भावनाओं पर काम करते हुए अकेले समय बिताएंकार्य के लिए शुभ रंग – हल्का गुलाबीप्यार के लिए शुभ रंग – सफेदकर्म टिप – खुद पर भरोसा बनाएं रखेंकुंभ – आज कोई शारीरिक गतिविधि करना बेहतर होगास्वास्थ्य स्थिर बना रहेगा। आपको किसी शारीरिक गतिविधि पर ध्यान देने की जरूरत होगी। काम पर आपको किसी पेपर वर्क पर ध्यान देने की आवश्यकता हो सकती है। आज दिन के दूसरे भाग में सहकर्मियों से अच्छी खबर मिलने की संभावना भी है। व्यवसाय वालों को अपनी टीम का विस्तार करने की जरूरत हो सकती है। परिवार के सदस्य आपको समझेंगे और स्पेस देने की कोशिश करेंगे। आज आपका सामाजिक जीवन स्थिर भी स्थिर बना रहेगा।लव टिप – पार्टनर अपने काम को लेकर तनाव में रहेगा और अपनी समस्या आपसे शेयर भी करेगाएक्टिविटि टिप – अपनी रचनात्मक ऊर्जा पर काम करना शुरू करेंकार्य के लिए शुभ रंग – ऑफ-व्हाइटप्यार के लिए शुभ रंग – समुद्री हराकर्म टिप – अपने फैसलों के लिए अनुमोदन नहीं लेंमीन – आज नींद में समस्या होने की संभावना हैनींद में समस्या होने की संभावना है। लेकिन काम के तनाव के कारण इमोशनल ईटिंग नहीं करें। काम स्थिर बना रहेगा। आज एक सामान्य दिन होगा जहां आपको अधूरे कार्यों पर ध्यान देने की जरूरत होगी। सहकर्मी अपनी जिम्मेदारीयों में व्यस्त रहेंगे जिससे आप आसानी से अपने कार्यो पर ध्यान दे पाएंगी। परिवार के सदस्य सहायक बने रहेंगे और आपको स्पेस देने की कोशिश करेंगे। आज आपका सामाजिक जीवन भी पीछे छूट सकता है, क्योंकि आपको अपने पार्टनर के साथ क्वालिटी टाइम बिताने की जरूरत होगी।लव टिप – पार्टनर के साथ मनमुटाव को समय से सुलझाने की कोशिश करेंएक्टिविटी टिप – काम से पहले नमक के पानी से नहाएंकार्य के लिए शुभ रंग – सफेदप्यार के लिए शुभ रंग – मौवकर्म टिप – अपनी रचनात्मक ऊर्जा पर काम करें#बाल #वनिता #महिला #वृद्ध #आश्रम .सभी देशवासियों को लोक आस्था एवं सूर्य उपासना के महापर्व छठ पूजा की हार्दिक बधाई। भगवान सूर्य देव की ऊर्जा एवं मां छठ की असीम कृपा से हम सभी का जीवन ज्योतिर्मय रहें तथा चहुंओर खुशहाली एवं समृद्धि का वास हो। लोक आस्था के महापर्व 'छठ' की हार्दिक शुभकामनाएं।भारतीय संस्कृति और प्रकृति के मध्य प्रगाढ़ संबंध को प्रदर्शित करता यह महापर्व सभी के जीवन में ऊर्जा व उत्साह का नव संचार करे, इस अवसर पर प्रकृति संरक्षण-संवर्धन के प्रति सजगता से सतत कार्य करते रहने का संकल्प लें।जय छठी मईया॥🙏#chhathpuja#वनिता #कासनियां #पंजाब 🌷🙏🙏🌷

मेष – एलर्जी आज थोड़ी समस्या खड़ी कर सकती है एलर्जी या सर्दी-खांसी के कारण आज सेहत पर ध्यान देने की जरूरत हो सकती है। अच्छा महसूस करने के लिए भाप लेना शुरू करें। नौकरी वाले लोगों को नए टीम के सदस्यों के साथ काम करने का मौका मिल सकता है। आज आप किसी प्रकार के रिसर्च में भी शामिल हो सकती हैं, जो आपके कार्यो में आपकी मदद करेगा। आज परिवार के सदस्य भी अपने जीवन में व्यस्त हो सकते हैं। आप काम से जुड़े मुद्दों पर परिवार के किसी बड़े सदस्य से सलाह लेने का प्रयास कर सकती हैं। आपका सामाजिक जीवन भी स्थिर बना रहेगा। लव टिप – काम में देरी पार्टनर से गलतफहमी का कारण बन सकती है। अपने पार्टनर से बहुत ज्यादा उम्मीदें नहीं रखें एक्टिविटि टिप – स्वीमिंग करें या लंबा समय पानी में बिताएं कार्य के लिए शुभ रंग – गहरा गुलाबी प्यार के लिए शुभ रंग – पीला कर्म टिप – समस्याओं को ज्यादा नहीं बढ़ाएं वृषभ – अत्यधिक काम समस्या खड़ी कर सकता है अधूरी नींद और लंबे समय तक काम करने के कारण स्वास्थ्य संवेदनशील हो सकता है। नौकरी करने वालों के लिए आज नए प्रोजेक्ट्स या नई नौकरी पर स्पष्टता आने की संभावना हो सकती है...