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राष्ट्र हिंदू धर्म में क्या अहिल्या वास्तव में निर्दोष थी? By वनिता कासनियां पंजाब आपमें से कई लोग सोच रहे होंगे कि आज मैं ये कौन सा विषय लेकर आ गया। हम सभी ने हमेशा यही पढ़ा है कि पंचकन्याओं में से एक अहिल्या सर्वथा निर्दोष थी और महर्षि गौतम ने उन्हें बिना सत्य जाने श्राप दे दिया था। बाद में श्रीराम ने उनका उद्धार किया था। बरसों से हम यही सुनते और देखते आ रहे हैं। किन्तु आज हम इस घटना के सत्य को जानने का प्रयत्न करेंगे।ऐसी शंकाएं लोगों के मन में केवल इसलिए आती हैं क्यूंकि उन्होंने कभी मूल ग्रन्थ पढ़ा ही नहीं होता। और जब मैं बोल रहा हूँ मूल ग्रन्थ, तो मैं वाल्मीकि रामायण की बात कर रहा हूँ, ना कि रामचरितमानस की। इसमें कोई संदेह नहीं है कि आज के समाज में रामचरितमानस वाल्मीकि रामायण से बहुत अधिक प्रचलित है किन्तु मूल ग्रन्थ तो वाल्मीकि रामायण ही है।अब चूँकि रामचरितमानस इतनी अधिक प्रचलित है, लोग उसी को पढ़ते हैं। यहाँ तक कि १९८७ में बनी रामानंद सागर का प्रसिद्ध सीरियल रामायण भी मुख्यतः रामचरितमानस पर ही आधारित था। अब जब लोग वही पढ़ते और देखते हैं जो हमारे सामने है, वे उस सत्य को नहीं जान पाते जो कि मूल ग्रन्थ में लिखा गया है। तो यदि आपको इस प्रश्न का वास्तविक उत्तर चाहिए तो आपको वाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड का ४८ वां सर्ग पढ़ना चाहिए।अब जो मैं बताने जा रहा हूँ उसे बड़े ध्यान से सुनिए और एक बात का विशेष ध्यान रखिये कि मैं ये बातें मूल वाल्मीकि रामायण से बता रहा हूँ। इसीलिए यदि आपने रामचरितमानस या रामायण का कोई और संस्करण पढ़ा है या कोई टीवी सीरियल देखा हो तो उसे एक पल के लिए भूल जाइये। वैसे तो वाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड के ४८ वें सर्ग में कुल ३३ श्लोक हैं किन्तु मैं केवल दो श्लोकों का वर्णन करूँगा जिससे आपको बात समझ में आ जाएगी।लोगों की ये आम धारणा है कि इंद्र गौतम ऋषि का वेश बना कर आये इसी कारण अहिल्या उन्हें पहचान नहीं पायी, जो कि बिलकुल गलत है। अहिल्या का जन्म स्वयं ब्रह्मदेव से हुआ था और उन्हें छला नहीं जा सकता था। वाल्मीकि रामायण में ये साफ लिखा है कि जब इंद्र गौतम ऋषि के वेश में आये और अहिल्या से प्रणय याचना की तब अहिल्या ने ये जान लिया था कि ये उनके पति नहीं हैं। किन्तु ये जान कर कि स्वयं देवराज इंद्र उनसे प्रणय याचना कर रहे हैं, अहिल्या ने सब कुछ जानते बुझते कौतुहल में उनकी बात मान ली। यह बात महर्षि विश्वामित्र श्रीराम और लक्ष्मण को बताते हैं।मुनिवेषं सहस्राक्षं विज्ञाय रघुनन्दन।मतिं चकार दुर्मेधा देवराजकुतूहलात्॥ बालकाण्ड, सर्ग ४८, श्लोक १९अर्थात: ‘रघुनन्दन ! महर्षि गौतम का वेष धारण करके आये हुए इन्द्र को पहचानकर भी उस दुर्बुद्धि नारी ने ‘अहो! देवराज इन्द्र मुझे चाहते हैं’ इस कौतूहल वश उनके साथ समागम का निश्चय करके वह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया।यहाँ तक कि इंद्र से समागम के पश्चात अहिल्या इंद्र को धन्यवाद देते हुए कहती हैं कि अब आप शीघ्रता से यहाँ से चले जाइये और महर्षि गौतम के क्रोध से मेरी और स्वयं अपनी रक्षा कीजिये।अथाब्रवीत् सुरश्रेष्ठं कृतार्थेनान्तरात्मना।कृतार्थास्मि सुरश्रेष्ठ गच्छ शीघ्रमितः प्रभो॥आत्मानं मां च देवेश सर्वथा रक्ष गौतमात्। बालकाण्ड, सर्ग ४८, श्लोक २०अर्थात: ‘रति के पश्चात् उसने देवराज इन्द्र से संतुष्टचित्त होकर कहा–’सुरश्रेष्ठ! मैं आपके समागम से कृतार्थ हो गयी। प्रभो! अब आप शीघ्र यहाँ से चले जाइये। देवेश्वर! महर्षि गौतम के कोप से आप अपनी और मेरी भी सब प्रकार से रक्षा कीजिये’।इसके बाद की कथा हम जानते हैं कि जब इंद्र वापस जाने के लिए बाहर निकले तो महर्षि गौतम ने उन्हें देख लिया। ये देख कर महर्षि गौतम ने प्रथम दंड इंद्र को ही दिया। महर्षि गौतम ने इंद्र को नपुंसक हो जाने का श्राप दे दिया।मम रूपं समास्थाय कृतवानसि दुर्मते।अकर्तव्यमिदं यस्माद विफलस्त्वं भविष्यसि॥ बालकाण्ड, सर्ग ४८, श्लोक २७अर्थात: “दुर्मते! तूने मेरा रूप धारण करके यह न करने योग्य पापकर्म किया है, इसलिये तू विफल (अण्डकोषों से रहित) हो जायगा’।गौतमेनैवमुक्तस्य सुरोषेण महात्मना।पेततुर्वृषणी भूमौ सहस्राक्षस्य तत्क्षणात्॥ बालकाण्ड, सर्ग ४८, श्लोक २८अर्थात: ‘रोष में भरे हुए महात्मा गौतम के ऐसा कहते ही सहस्राक्ष इन्द्र के दोनों अण्डकोष उसी क्षण पृथ्वीपर गिर पड़े।अब आते हैं अहिल्या के दंड पर। लोगों को ऐसा लगता है कि महर्षि गौतम ने उन्हें पत्थर बन जाने का श्राप दिया, पर ये भी गलत है। वास्तव में गौतम ऋषि ने अहिल्या को कई हजार वर्षों तक अदृश्य रूप में उसी आश्रम में प्रायश्चित करने का श्राप दिया।तथा शप्त्वा च वै शक्रं भार्यामपि च शप्तवान्।इह वर्षसहस्राणि बहूनि निवसिष्यसि ॥ बालकाण्ड, सर्ग ४८, श्लोक २९वातभक्षा निराहारा तप्यन्ती भस्मशायिनी।अदृश्या सर्वभूतानामाश्रमेऽस्मिन् वसिष्यसि॥ बालकाण्ड, सर्ग ४८, श्लोक ३०अर्थात: इन्द्र को इस प्रकार शाप देकर गौतम ने अपनी पत्नी को भी शाप दिया - 'दुराचारिणी! तू भी यहाँ कई हजार वर्षों तक केवल हवा पीकर या उपवास करके कष्ट उठाती हुई राख में पड़ी रहेगी। समस्त प्राणियों से अदृश्य रहकर इस आश्रम में निवास करेगी।'यदा त्वेतद् वनं घोरं रामो दशरथात्मजः।आगमिष्यति दुर्धर्षस्तदा पूता भविष्यसि॥ बालकाण्ड, सर्ग ४८, श्लोक ३१तस्यातिथ्येन दुर्वृत्ते लोभमोहविवर्जिता।।मत्सकाशं मुदा युक्ता स्वं वपुर्धारयिष्यसि॥ बालकाण्ड, सर्ग ४८, श्लोक ३२अर्थात: जब दुर्धर्ष दशरथ-कुमार राम इस घोर वन में पदार्पण करेंगे, उस समय तू पवित्र होगी। उनका आतिथ्य-सत्कार करने से तेरे लोभ-मोह आदि दोष दूर हो जायँगे और तू प्रसन्नतापूर्वक मेरे पास पहुँचकर अपना पूर्व शरीर धारण कर लेगी।’लोग ऐसा भी सोचते हैं कि श्रीराम ने शिलरूपी अहिल्या के मस्तक पर अपने चरण रख कर उसका उद्धार किया था, जो बिलकुल गलत है। वाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड के ४९ वें सर्ग में महर्षि विश्वामित्र श्रीराम से कहते हैं कि 'हे राम! ये तपस्विनी सहस्त्रों वर्षों से तप करते हुए तुम्हारी प्रतीक्षा कर रही है इसलिए तुम दोनों भाई जाकर इसके चरण छुओ।' तब श्रीराम और लक्ष्मण अहिल्या के चरण छूते हैं जिससे अहिल्या श्रापमुक्त होती है और तब महर्षि गौतम पुनः उसे अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार करते हैं।राघवौ तु तदा तस्याः पादौ जगृहतुर्मुदा।स्मरन्ती गौतमवचः प्रतिजग्राह सा हि तौ॥बालकाण्ड, सर्ग ४९, श्लोक १७अर्थात: उस समय श्रीराम और लक्ष्मण ने बड़ी प्रसन्नता के साथ अहल्या के दोनों चरणोंका स्पर्श किया। महर्षिगौतम के वचनों का स्मरण करके अहल्या ने बड़ी सावधानी के साथ उन दोनों भाइयों को आदरणीय अतिथि के रूपमें अपनाया।अंत में मैं ये कहना चाहूंगा कि किसी को रामचरितमानस के प्रति कोई शंका नहीं होनी चाहिए। वह निःसंदेह हिन्दू धर्म के सबसे महानतम ग्रंथों में से एक है। वास्तव में तुलसीदास जी ने जिस काल में रामायण की रचना की उस समय पूरा देश और समाज मुस्लिम आक्रांताओं के अत्याचारों से दुखी था। इसी कारण उन्होंने रामचरितमानस को पूर्ण भक्ति रस में उस प्रकार लिखा ताकि समाज में श्रीराम के प्रति आस्था कम ना हो पाए। तो रामचरितमानस अपने युग में पूर्ण प्रासंगिक थी किन्तु हाँ, यदि सत्य जानना हो तो हमें वाल्मीकि रामायण पढ़ना ही चाहिए। आज की पीढ़ी के लिए ये बहुत आवश्यक है कि वो हमारे मूल धर्मग्रंथों का अध्ययन करे अन्यथा इसी प्रकार भ्रमित होते रहेंगे। जय श्रीराम।

राष्ट्र हिंदू धर्म में क्या अहिल्या वास्तव में निर्दोष थी?

आपमें से कई लोग सोच रहे होंगे कि आज मैं ये कौन सा विषय लेकर आ गया। हम सभी ने हमेशा यही पढ़ा है कि पंचकन्याओं में से एक अहिल्या सर्वथा निर्दोष थी और महर्षि गौतम ने उन्हें बिना सत्य जाने श्राप दे दिया था। बाद में श्रीराम ने उनका उद्धार किया था। बरसों से हम यही सुनते और देखते आ रहे हैं। किन्तु आज हम इस घटना के सत्य को जानने का प्रयत्न करेंगे।

ऐसी शंकाएं लोगों के मन में केवल इसलिए आती हैं क्यूंकि उन्होंने कभी मूल ग्रन्थ पढ़ा ही नहीं होता। और जब मैं बोल रहा हूँ मूल ग्रन्थ, तो मैं वाल्मीकि रामायण की बात कर रहा हूँ, ना कि रामचरितमानस की। इसमें कोई संदेह नहीं है कि आज के समाज में रामचरितमानस वाल्मीकि रामायण से बहुत अधिक प्रचलित है किन्तु मूल ग्रन्थ तो वाल्मीकि रामायण ही है।

अब चूँकि रामचरितमानस इतनी अधिक प्रचलित है, लोग उसी को पढ़ते हैं। यहाँ तक कि १९८७ में बनी रामानंद सागर का प्रसिद्ध सीरियल रामायण भी मुख्यतः रामचरितमानस पर ही आधारित था। अब जब लोग वही पढ़ते और देखते हैं जो हमारे सामने है, वे उस सत्य को नहीं जान पाते जो कि मूल ग्रन्थ में लिखा गया है। तो यदि आपको इस प्रश्न का वास्तविक उत्तर चाहिए तो आपको वाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड का ४८ वां सर्ग पढ़ना चाहिए।

अब जो मैं बताने जा रहा हूँ उसे बड़े ध्यान से सुनिए और एक बात का विशेष ध्यान रखिये कि मैं ये बातें मूल वाल्मीकि रामायण से बता रहा हूँ। इसीलिए यदि आपने रामचरितमानस या रामायण का कोई और संस्करण पढ़ा है या कोई टीवी सीरियल देखा हो तो उसे एक पल के लिए भूल जाइये। वैसे तो वाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड के ४८ वें सर्ग में कुल ३३ श्लोक हैं किन्तु मैं केवल दो श्लोकों का वर्णन करूँगा जिससे आपको बात समझ में आ जाएगी।

लोगों की ये आम धारणा है कि इंद्र गौतम ऋषि का वेश बना कर आये इसी कारण अहिल्या उन्हें पहचान नहीं पायी, जो कि बिलकुल गलत है। अहिल्या का जन्म स्वयं ब्रह्मदेव से हुआ था और उन्हें छला नहीं जा सकता था। वाल्मीकि रामायण में ये साफ लिखा है कि जब इंद्र गौतम ऋषि के वेश में आये और अहिल्या से प्रणय याचना की तब अहिल्या ने ये जान लिया था कि ये उनके पति नहीं हैं। किन्तु ये जान कर कि स्वयं देवराज इंद्र उनसे प्रणय याचना कर रहे हैं, अहिल्या ने सब कुछ जानते बुझते कौतुहल में उनकी बात मान ली। यह बात महर्षि विश्वामित्र श्रीराम और लक्ष्मण को बताते हैं।

मुनिवेषं सहस्राक्षं विज्ञाय रघुनन्दन।
मतिं चकार दुर्मेधा देवराजकुतूहलात्॥ 
बालकाण्ड, सर्ग ४८, श्लोक १९

अर्थात: ‘रघुनन्दन ! महर्षि गौतम का वेष धारण करके आये हुए इन्द्र को पहचानकर भी उस दुर्बुद्धि नारी ने ‘अहो! देवराज इन्द्र मुझे चाहते हैं’ इस कौतूहल वश उनके साथ समागम का निश्चय करके वह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया।

यहाँ तक कि इंद्र से समागम के पश्चात अहिल्या इंद्र को धन्यवाद देते हुए कहती हैं कि अब आप शीघ्रता से यहाँ से चले जाइये और महर्षि गौतम के क्रोध से मेरी और स्वयं अपनी रक्षा कीजिये।
अथाब्रवीत् सुरश्रेष्ठं कृतार्थेनान्तरात्मना।
कृतार्थास्मि सुरश्रेष्ठ गच्छ शीघ्रमितः प्रभो॥
आत्मानं मां च देवेश सर्वथा रक्ष गौतमात्। 
बालकाण्ड, सर्ग ४८, श्लोक २०

अर्थात: ‘रति के पश्चात् उसने देवराज इन्द्र से संतुष्टचित्त होकर कहा–’सुरश्रेष्ठ! मैं आपके समागम से कृतार्थ हो गयी। प्रभो! अब आप शीघ्र यहाँ से चले जाइये। देवेश्वर! महर्षि गौतम के कोप से आप अपनी और मेरी भी सब प्रकार से रक्षा कीजिये’।

इसके बाद की कथा हम जानते हैं कि जब इंद्र वापस जाने के लिए बाहर निकले तो महर्षि गौतम ने उन्हें देख लिया। ये देख कर महर्षि गौतम ने प्रथम दंड इंद्र को ही दिया। महर्षि गौतम ने इंद्र को नपुंसक हो जाने का श्राप दे दिया।

मम रूपं समास्थाय कृतवानसि दुर्मते।
अकर्तव्यमिदं यस्माद विफलस्त्वं भविष्यसि॥ 
बालकाण्ड, सर्ग ४८, श्लोक २७

अर्थात: “दुर्मते! तूने मेरा रूप धारण करके यह न करने योग्य पापकर्म किया है, इसलिये तू विफल (अण्डकोषों से रहित) हो जायगा’।

गौतमेनैवमुक्तस्य सुरोषेण महात्मना।
पेततुर्वृषणी भूमौ सहस्राक्षस्य तत्क्षणात्॥ 
बालकाण्ड, सर्ग ४८, श्लोक २८

अर्थात: ‘रोष में भरे हुए महात्मा गौतम के ऐसा कहते ही सहस्राक्ष इन्द्र के दोनों अण्डकोष उसी क्षण पृथ्वीपर गिर पड़े।

अब आते हैं अहिल्या के दंड पर। लोगों को ऐसा लगता है कि महर्षि गौतम ने उन्हें पत्थर बन जाने का श्राप दिया, पर ये भी गलत है। वास्तव में गौतम ऋषि ने अहिल्या को कई हजार वर्षों तक अदृश्य रूप में उसी आश्रम में प्रायश्चित करने का श्राप दिया।

तथा शप्त्वा च वै शक्रं भार्यामपि च शप्तवान्।
इह वर्षसहस्राणि बहूनि निवसिष्यसि ॥ 
बालकाण्ड, सर्ग ४८, श्लोक २९

वातभक्षा निराहारा तप्यन्ती भस्मशायिनी।
अदृश्या सर्वभूतानामाश्रमेऽस्मिन् वसिष्यसि॥ 
बालकाण्ड, सर्ग ४८, श्लोक ३०

अर्थात: इन्द्र को इस प्रकार शाप देकर गौतम ने अपनी पत्नी को भी शाप दिया - 'दुराचारिणी! तू भी यहाँ कई हजार वर्षों तक केवल हवा पीकर या उपवास करके कष्ट उठाती हुई राख में पड़ी रहेगी। समस्त प्राणियों से अदृश्य रहकर इस आश्रम में निवास करेगी।'

यदा त्वेतद् वनं घोरं रामो दशरथात्मजः।
आगमिष्यति दुर्धर्षस्तदा पूता भविष्यसि॥ 
बालकाण्ड, सर्ग ४८, श्लोक ३१

तस्यातिथ्येन दुर्वृत्ते लोभमोहविवर्जिता।।
मत्सकाशं मुदा युक्ता स्वं वपुर्धारयिष्यसि॥ 
बालकाण्ड, सर्ग ४८, श्लोक ३२

अर्थात: जब दुर्धर्ष दशरथ-कुमार राम इस घोर वन में पदार्पण करेंगे, उस समय तू पवित्र होगी। उनका आतिथ्य-सत्कार करने से तेरे लोभ-मोह आदि दोष दूर हो जायँगे और तू प्रसन्नतापूर्वक मेरे पास पहुँचकर अपना पूर्व शरीर धारण कर लेगी।’

लोग ऐसा भी सोचते हैं कि श्रीराम ने शिलरूपी अहिल्या के मस्तक पर अपने चरण रख कर उसका उद्धार किया था, जो बिलकुल गलत है। वाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड के ४९ वें सर्ग में महर्षि विश्वामित्र श्रीराम से कहते हैं कि 'हे राम! ये तपस्विनी सहस्त्रों वर्षों से तप करते हुए तुम्हारी प्रतीक्षा कर रही है इसलिए तुम दोनों भाई जाकर इसके चरण छुओ।' तब श्रीराम और लक्ष्मण अहिल्या के चरण छूते हैं जिससे अहिल्या श्रापमुक्त होती है और तब महर्षि गौतम पुनः उसे अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार करते हैं।

राघवौ तु तदा तस्याः पादौ जगृहतुर्मुदा।
स्मरन्ती गौतमवचः प्रतिजग्राह सा हि तौ॥
बालकाण्ड, सर्ग ४९, श्लोक १७

अर्थात: उस समय श्रीराम और लक्ष्मण ने बड़ी प्रसन्नता के साथ अहल्या के दोनों चरणोंका स्पर्श किया। महर्षिगौतम के वचनों का स्मरण करके अहल्या ने बड़ी सावधानी के साथ उन दोनों भाइयों को आदरणीय अतिथि के रूपमें अपनाया।

अंत में मैं ये कहना चाहूंगा कि किसी को रामचरितमानस के प्रति कोई शंका नहीं होनी चाहिए। वह निःसंदेह हिन्दू धर्म के सबसे महानतम ग्रंथों में से एक है। वास्तव में तुलसीदास जी ने जिस काल में रामायण की रचना की उस समय पूरा देश और समाज मुस्लिम आक्रांताओं के अत्याचारों से दुखी था। इसी कारण उन्होंने रामचरितमानस को पूर्ण भक्ति रस में उस प्रकार लिखा ताकि समाज में श्रीराम के प्रति आस्था कम ना हो पाए। 

तो रामचरितमानस अपने युग में पूर्ण प्रासंगिक थी किन्तु हाँ, यदि सत्य जानना हो तो हमें वाल्मीकि रामायण पढ़ना ही चाहिए। आज की पीढ़ी के लिए ये बहुत आवश्यक है कि वो हमारे मूल धर्मग्रंथों का अध्ययन करे अन्यथा इसी प्रकार भ्रमित होते रहेंगे। जय श्रीराम।

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मेष – एलर्जी आज थोड़ी समस्या खड़ी कर सकती हैएलर्जी या सर्दी-खांसी के कारण आज सेहत पर ध्यान देने की जरूरत हो सकती है। अच्छा महसूस करने के लिए भाप लेना शुरू करें। नौकरी वाले लोगों को नए टीम के सदस्यों के साथ काम करने का मौका मिल सकता है। आज आप किसी प्रकार के रिसर्च में भी शामिल हो सकती हैं, जो आपके कार्यो में आपकी मदद करेगा। आज परिवार के सदस्य भी अपने जीवन में व्यस्त हो सकते हैं। आप काम से जुड़े मुद्दों पर परिवार के किसी बड़े सदस्य से सलाह लेने का प्रयास कर सकती हैं। आपका सामाजिक जीवन भी स्थिर बना रहेगा।लव टिप – काम में देरी पार्टनर से गलतफहमी का कारण बन सकती है। अपने पार्टनर से बहुत ज्यादा उम्मीदें नहीं रखेंएक्टिविटि टिप – स्वीमिंग करें या लंबा समय पानी में बिताएंकार्य के लिए शुभ रंग – गहरा गुलाबीप्यार के लिए शुभ रंग – पीलाकर्म टिप – समस्याओं को ज्यादा नहीं बढ़ाएंवृषभ – अत्यधिक काम समस्या खड़ी कर सकता हैअधूरी नींद और लंबे समय तक काम करने के कारण स्वास्थ्य संवेदनशील हो सकता है। नौकरी करने वालों के लिए आज नए प्रोजेक्ट्स या नई नौकरी पर स्पष्टता आने की संभावना हो सकती है। आज फाइनेंस स्थिर रहेगा साथ ही आप अपनों का ख्याल भी रख पाएंगी। पारिवारिक जीवन अस्थिर रहेगा, क्योंकि हो सकता है कि आपका कोई अपना आपकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरे। सामाजिक जीवन पीछे छूट सकता है, क्योंकि आप घर पर समय बिताना चाहेंगी और अच्छी नींद लेना चाहेंगी।लव टिप – अपने पार्टनर के साथ मतभेद नहीं रखेंएक्टिविटि टिप – अपना मनपसंद भोजन पकाने से आपको बेहतर महसूस करने में मदद मिल सकती हैकाम के लिए शुभ रंग – मौवप्यार के लिए शुभ रंग – गहरा हराकर्म टिप – अतीत को जाने देंमिथुन – आज काम और सेहत स्थिर बने रहेंगेआज स्वास्थ्य स्थिर बना रहेगा। लेकिन संचार से जुड़ी किसी समस्या के कारण काम स्थिर हो सकता है। कुछ मीटिंग्स के लिए आपको लोगों के साथ आगे-पीछे होना पड़ सकता है। लेकिन आखिर में सभी चीजें ठीक होती जाएंगी। पारिवारिक ड्रामा चलता रहेगा और आप किसी के द्वारा की गई टिप्पणियों से प्रभावित हो सकती हैं। खुद को शांत रखने के लिए किसी दोस्त से बात करें।लव टिप – आज पार्टनर सपोर्टिव रहेगा और आपको तनाव को दूर करने के लिए समय और स्पेस देगाएक्टिविटि टिप – गहरी सांस लेने या जप करने से आपको शांत होने में मदद मिलेगीकार्य के लिए शुभ रंग – ऑफ-व्हाइटप्यार के लिए शुभ रंग – कालाकर्म टिप – खुद पर भरोसा बनाएं रखेंकर्क – काम पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करने की कोशिश करेंस्वास्थ्य स्थिर बना रहेगा लेकिन काम पर किसी आलोचना के प्रति आप संवेदनशील हो सकती हैं। आपको काम पर ध्यान देने के साथ लोगों को स्पेस देने की आवश्यकता है। उल्टा रिएक्शन करने से चीजें और ज्यादा खराब हो सकती हैं। पारिवारिक जीवन स्थिर बना रहेगा और आप परिवार के साथ क्वालिटी टाइम बिता पाएंगी। आज कुछ सामाजिक योजनाएं आपका मनोरंजन कर सकती हैं। दोस्त आपको बेहतर तरीके से समझेंगे और आपके विजन पर ध्यान भी देंगे।लव टिप – आज पार्टनर आपकी सेहत को लेकर चिंतित हो सकता हैएक्टिविटि टिप – मेडिटेटिव संगीत सुनने में समय व्यतीत करेंकार्य के लिए शुभ रंग – पीलाप्यार के लिए शुभ रंग – सफेदकर्म टिप – लोगों की बातों पर ध्यान नहीं देंसिंह – अपने पारिवारिक जीवन को स्थिर बनाएं रखेंकमर के निचले हिस्से की समस्या के कारण स्वास्थ्य पर ध्यान देने की जरूरत हो सकती है। खुद को ज्यादा जोर नहीं डाले। आज काम में व्यस्तता आने की संभावना है। पुराने क्लाइंट से ज्यादा काम मिलने की संभावना भी है। काम पर दूसरों के फैसलों को नज़रअंदाज करने की गलती नहीं करें। फिर भले ही आप उनसे सहमत नहीं हों। परिवार के सदस्यों के बीच मनमुटाव होने के कारण आपका पारिवारिक जीवन अस्थिर हो सकता है। आज सामाजिक जीवन आपकी शाम व्यस्त रख सकते हैं।लव टिप – आज पार्टनर चिड़चिड़ा होने के कारण तनाव में हो सकता हैएक्टिविटि टिप – कोई खेल खेलना शुरू करेंकार्य के लिए शुभ रंग – गहरा गुलाबीप्यार के लिए शुभ रंग – हल्का हराकर्म टिप – अतित को जाने देंकन्या – अत्यधिक तनाव परेशानी खड़ी कर सकता हैब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव होने के कारण सेहत पर ध्यान देने की आवश्यकता हो सकती है। ज्यादा तनाव लेने से परहेज करें। आज काम पर दिन स्थिर रहेगा, लेकिन मीटिंग्स में देरी होने की संभावना भी है। इससे आपको तैयारी करने के साथ योजना बनाने का पर्याप्त समय मिल पाएगा। अतीत से किसी मतभेद के कारण पारिवारिक जीवन तनावपूर्ण हो सकता है। कोई आपके चीजों को छुपाने की कोशिश करेगा, जो मतभेद का कारण बन सकता है। आज सामाजिक जीवन भी पीछे छुट्ने की संभावना है।लव टिप – पार्टनर आज आपको बेहतर महसूस कराने की कोशिश करेगाएक्टिविटि टिप – अपने कमरे को व्यवस्थित करके रखेंकार्य के लिए शुभ रंग – हल्का हराप्यार के लिए शुभ रंग – गहरा नीलाकर्म टिप – एक अच्छी श्रोता बनेंतुला – आज सेहत पर खास ध्यान देने की कोशिश करेंसिर दर्द और आंखों से जुड़ी समस्याओं के कारण सेहत पर ध्यान देने की जरूरत हो सकती है। काम स्थिर बना रहेगा, लेकिन सहकर्मियों के साथ सहनशील बनी रहें। क्योंकि सिर्फ उनके काम करने का तरीका अलग हो सकता है। अगर आप सम्मान पाना चाहती हैं, तो उनके फैसलों का सम्मान करने की कोशिश करें। आज परिवार के किसी सदस्य के भावनात्मक स्वास्थ्य पर ध्यान देने की जरूरत हो सकती है। क्योंकि उनके जीवन में चल रहे तनाव के कारण वे परेशान हो सकती हैं। आपका कोई पुराना दोस्त आपसे संपर्क करने की कोशिश कर सकता है।लव टिप – पार्टनर आज आपकी बहुत ज्यादा केयर कर सकता हैएक्टिविटी टिप – प्रकृति के बीच समय बिताएंकार्य के लिए शुभ रंग – हल्का हराप्यार के लिए शुभ रंग – लैवेंडरकर्म टिप – अधिक गंभीर बनी रहेंवृश्चिक – मानसिक तनाव परेशानी का कारण बन सकता हैआज आपका काम और सेहत स्थिर बने रहेंगे, लेकिन मानसिक रूप से अस्वस्थ होने के कारण आपको ध्यान केंद्रित करने में समस्या हो सकती है। आज आपको गंभीर होने की आवश्यकता है, लेकिन कोई शारीरिक कदम उठाने की कोशिश नहीं करें। पुराने ग्राहक अधूरे कार्यो को पूरा करने के लिए आप पर दबाव बना सकते हैं। आपके परिवार के सदस्य आपसे नाराज हो सकते हैं। सामाजिक जीवन स्थिर बना रहेगा। आपका कोई दोस्त व्यापार के नए विचारों पर बातचीत करने के लिए आ सकता है।लव टिप – पार्टनर सपोर्टिव बना रहेगा और आपको स्पेस देने की कोशिश करेगाएक्टिविटि टिप – अपने मूड को बेहतर करने के लिए अच्छी फिल्में देखना शुरू करेंकार्य के लिए शुभ रंग – ऑफ-व्हाइटप्यार के लिए शुभ रंग – लालकर्म टिप – मूडी बनने से परहेज करेंधनु – बाहर के खाने से परहेज करने की कोशिश करेंपेट से जुड़ी समस्याओं के कारण सेहत पर ध्यान देने की आवश्यकता हो सकती है। इसलिए बाहर के खाने से परहेज रखें। आज काम में व्यस्तता हो सकती है। आपको रुके हुए कार्यो को पूरा करने पर ध्यान देना होगा। इससे बचने के बजाय अधिक गंभीर बनने का प्रयास करें। काम पर अटका हुआ धन दिन के दूसरे भाग में देरी का कारण बन सकता है। परिवार के किसी बड़े सदस्य का स्वास्थ्य संवेदनशील हो सकता है। उनके साथ समय बिताएं, क्योंकि वे भावनात्मक रूप से कमजोर महसूस कर रहे होंगे।लव टिप – पार्टनर पर गुस्सा करने से परहेज करेंएक्टिविटि टिप – काम के बाद नमक के पानी से स्नान करेंकार्य के लिए शुभ रंग – गहरा नीलाप्यार के लिए शुभ रंग – सफेदकर्म टिप – अधिक फ्लेक्सिबल बनी रहेंमकर – सोच समझकर ही कोई फैसला करेंआज काम स्थिर बना रहेगा, लेकिन मानसिक रूप से अस्वस्थ होने के कारण आपको ध्यान केंद्रित करने में समस्या होगी। आपको गंभीर होने की जरूरत भी है, लेकिन आज कोई शारीरिक कदम नहीं उठाएं। आपके परिवार के सदस्य घरेलू काम से जुड़े किसी कार्य के लिए आपको परेशान कर सकते हैं। सहनशील बनकर इसे पूरा करें या इसे किसी ऐसे व्यक्ति को सौंपें जो इसे संभाल सके। आज आपका सामाजिक जीवन स्थिर बना रहेगा। आप दूसरे के दोस्तों से फोन के जरिए जुड़ सकती हैं।लव टिप – पार्टनर रिलेशनशिप पर स्पष्टता पाने के लिए आपके साथ चर्चा करना चाहेगाएक्टिविटि टिप – अपनी भावनाओं पर काम करते हुए अकेले समय बिताएंकार्य के लिए शुभ रंग – हल्का गुलाबीप्यार के लिए शुभ रंग – सफेदकर्म टिप – खुद पर भरोसा बनाएं रखेंकुंभ – आज कोई शारीरिक गतिविधि करना बेहतर होगास्वास्थ्य स्थिर बना रहेगा। आपको किसी शारीरिक गतिविधि पर ध्यान देने की जरूरत होगी। काम पर आपको किसी पेपर वर्क पर ध्यान देने की आवश्यकता हो सकती है। आज दिन के दूसरे भाग में सहकर्मियों से अच्छी खबर मिलने की संभावना भी है। व्यवसाय वालों को अपनी टीम का विस्तार करने की जरूरत हो सकती है। परिवार के सदस्य आपको समझेंगे और स्पेस देने की कोशिश करेंगे। आज आपका सामाजिक जीवन स्थिर भी स्थिर बना रहेगा।लव टिप – पार्टनर अपने काम को लेकर तनाव में रहेगा और अपनी समस्या आपसे शेयर भी करेगाएक्टिविटि टिप – अपनी रचनात्मक ऊर्जा पर काम करना शुरू करेंकार्य के लिए शुभ रंग – ऑफ-व्हाइटप्यार के लिए शुभ रंग – समुद्री हराकर्म टिप – अपने फैसलों के लिए अनुमोदन नहीं लेंमीन – आज नींद में समस्या होने की संभावना हैनींद में समस्या होने की संभावना है। लेकिन काम के तनाव के कारण इमोशनल ईटिंग नहीं करें। काम स्थिर बना रहेगा। आज एक सामान्य दिन होगा जहां आपको अधूरे कार्यों पर ध्यान देने की जरूरत होगी। सहकर्मी अपनी जिम्मेदारीयों में व्यस्त रहेंगे जिससे आप आसानी से अपने कार्यो पर ध्यान दे पाएंगी। परिवार के सदस्य सहायक बने रहेंगे और आपको स्पेस देने की कोशिश करेंगे। आज आपका सामाजिक जीवन भी पीछे छूट सकता है, क्योंकि आपको अपने पार्टनर के साथ क्वालिटी टाइम बिताने की जरूरत होगी।लव टिप – पार्टनर के साथ मनमुटाव को समय से सुलझाने की कोशिश करेंएक्टिविटी टिप – काम से पहले नमक के पानी से नहाएंकार्य के लिए शुभ रंग – सफेदप्यार के लिए शुभ रंग – मौवकर्म टिप – अपनी रचनात्मक ऊर्जा पर काम करें#बाल #वनिता #महिला #वृद्ध #आश्रम .सभी देशवासियों को लोक आस्था एवं सूर्य उपासना के महापर्व छठ पूजा की हार्दिक बधाई। भगवान सूर्य देव की ऊर्जा एवं मां छठ की असीम कृपा से हम सभी का जीवन ज्योतिर्मय रहें तथा चहुंओर खुशहाली एवं समृद्धि का वास हो। लोक आस्था के महापर्व 'छठ' की हार्दिक शुभकामनाएं।भारतीय संस्कृति और प्रकृति के मध्य प्रगाढ़ संबंध को प्रदर्शित करता यह महापर्व सभी के जीवन में ऊर्जा व उत्साह का नव संचार करे, इस अवसर पर प्रकृति संरक्षण-संवर्धन के प्रति सजगता से सतत कार्य करते रहने का संकल्प लें।जय छठी मईया॥🙏#chhathpuja#वनिता #कासनियां #पंजाब 🌷🙏🙏🌷

मेष – एलर्जी आज थोड़ी समस्या खड़ी कर सकती है एलर्जी या सर्दी-खांसी के कारण आज सेहत पर ध्यान देने की जरूरत हो सकती है। अच्छा महसूस करने के लिए भाप लेना शुरू करें। नौकरी वाले लोगों को नए टीम के सदस्यों के साथ काम करने का मौका मिल सकता है। आज आप किसी प्रकार के रिसर्च में भी शामिल हो सकती हैं, जो आपके कार्यो में आपकी मदद करेगा। आज परिवार के सदस्य भी अपने जीवन में व्यस्त हो सकते हैं। आप काम से जुड़े मुद्दों पर परिवार के किसी बड़े सदस्य से सलाह लेने का प्रयास कर सकती हैं। आपका सामाजिक जीवन भी स्थिर बना रहेगा। लव टिप – काम में देरी पार्टनर से गलतफहमी का कारण बन सकती है। अपने पार्टनर से बहुत ज्यादा उम्मीदें नहीं रखें एक्टिविटि टिप – स्वीमिंग करें या लंबा समय पानी में बिताएं कार्य के लिए शुभ रंग – गहरा गुलाबी प्यार के लिए शुभ रंग – पीला कर्म टिप – समस्याओं को ज्यादा नहीं बढ़ाएं वृषभ – अत्यधिक काम समस्या खड़ी कर सकता है अधूरी नींद और लंबे समय तक काम करने के कारण स्वास्थ्य संवेदनशील हो सकता है। नौकरी करने वालों के लिए आज नए प्रोजेक्ट्स या नई नौकरी पर स्पष्टता आने की संभावना हो सकती है...